मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के बीच आज केंद्र सरकार ने डीजल को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दी है। इसके अलावा जेट फ्यू पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 42 रुपये प्रति लीटर कर दी है।
26 मार्च को डीजल पर बढ़ा था निर्यात शुल्क
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि शुल्क में यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इससे पहले 26 मार्च को सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया था। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये शुल्क लगाए गए थे। इन शुल्कों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से बने हालात ने कच्चे तेल की कीमतों को काफी बढ़ा दिया है। इससे निजी रिफाइनरियां घरेलू पंपों के बजाय विदेश में तेल बेचकर भारी मुनाफा कमा रही थीं। अब शुल्क बढ़न से निर्यात करना महंगा होगा और देश के अंदर पैदा हो रहा ईधन का संकट घट जाएगा। हालांकि सरकार के इस फैसले से तेल कंपनियों को घाटा होगा। उनका बिजनेस काफी प्रभावित होगा।
आम जनता पर होगा क्या असर?
डीजल और जेट फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में इस भारी बढ़ोतरी का आम जनता पर सीधा असर नहीं होगा। यह टैक्स निर्यात (Export) पर लगाया गया है। इसका मतलब है कि भारत में पेट्रोल पंपों पर डीजल के दाम इस वजह से नहीं बढ़ेंगे।
आम जनता पर होगा क्या असर?
डीजल और जेट फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में इस भारी बढ़ोतरी का आम जनता पर सीधा असर नहीं होगा। यह टैक्स निर्यात (Export) पर लगाया गया है। इसका मतलब है कि भारत में पेट्रोल पंपों पर डीजल के दाम इस वजह से नहीं बढ़ेंगे















