किसानों को धोखा देने वाले नकली और घटिया बीज कारोबार पर अब केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार बजट सत्र में लगभग सात दशक पुराने सीड एक्ट को बदलकर एक नया और सख्त कानून लाने जा रही है। इस कानून में बीज की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सबसे अहम रखा जाएगा।

नए कानून के तहत बिना पंजीकरण के कोई भी बीज कंपनी, उत्पादक या विक्रेता बीज नहीं बेच पाएगा। जो जानबूझकर घटिया बीज बेचेंगे, उन्हें तीन साल तक की जेल और 30 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। फिलहाल, विधेयक को सार्वजनिक कर किसान संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
पूरी आपूर्ति श्रृंखला होगी जिम्मेदार
1966 में बनाए गए मौजूदा कानून में केवल पांच सौ रुपये का जुर्माना था और डिजिटल निगरानी का कोई प्रावधान नहीं था। इसके चलते नकली बीज बेचने वाले आसानी से बच जाते थे। नए कानून में बाजार में बिकने वाले हर बीज का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। पैकेट पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करने पर यह पता चल सकेगा कि बीज कहां उत्पादित और किस विक्रेता के जरिए किसान तक पहुंचा।

इस ट्रेसिबिलिटी व्यवस्था से नकली और घटिया बीज लंबे समय तक बाजार में टिक नहीं पाएंगे और दोषी की पहचान तुरंत हो सकेगी।

सख्ती के साथ संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जोर इस बात पर है कि बीज केवल कृषि इनपुट नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका के साथ खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसलिए बीज कंपनियों, प्रसंस्करण इकाईयों, डीलरों और पौध नर्सरियों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया जा रहा है। इससे न केवल फर्जी कंपनियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों को भी भरोसा मिलेगा कि वे अधिकृत और भरोसेमंद स्त्रोत से बीज खरीद रहे हैं।
सख्ती के साथ संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की गई है। नया कानून किसानों की परंपरागत बीज प्रणाली में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। किसान अपने बीज बो सकेंगे। लेन-देन भी कर सकेंगे। गांवों में बीज विनिमय परंपरा भी सुरक्षित रहेगी। कार्रवाई सिर्फ उन्हीं पर होगी, जो नकली और घटिया बीज का कारोबार करेंगे। प्रस्तावित विधेयक में जुर्माने और सजा को प्रभावी बनाकर संदेश दिया गया है कि किसान को नुकसान पहुंचाना अब कम जोखिम वाला अपराध नहीं रहेगा।
















