जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के तहत करीब 8,000 संदिग्ध “म्यूल अकाउंट” फ्रीज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन खातों के जरिए भेजा गया पैसा देश विरोधी गतिविधियों और आतंकवाद को फंड करने में इस्तेमाल हो सकता है।
म्यूल अकाउंट बना नई चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, “म्यूल अकाउंट” साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का नया तरीका बन गया है। इन खातों का इस्तेमाल अवैध लेन-देन को छिपाने के लिए किया जाता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय और केंद्र शासित प्रदेश की एजेंसियां बैंकों के साथ मिलकर ऐसे खातों पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
‘आतंकवाद को फंड करना गंभीर अपराध’
काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर के एसएसपी ताहिर अशरफ भाटी ने कहा कि आतंकवाद को फाइनेंस करना बेहद गंभीर अपराध है और एजेंसियां इसे खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे पैसों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में हो सकता है। हमारा फोकस यह पता लगाने पर है कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां भेजा जा रहा है, जो एक बड़ी चुनौती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में इन पैसों के अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आ रहे हैं और कुछ रकम डिजिटल करेंसी में बदल दी जाती है, जिससे ट्रैक करना और मुश्किल हो जाता है।
हजारों खाते जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, हजारों बैंक खाते फिलहाल जांच के दायरे में हैं। इनमें से कई खाते संदिग्ध पाए गए हैं और उनकी गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए खाते खोलते हैं, जबकि कुछ लोगों को नौकरी, कमीशन या अन्य फायदे का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते हैं। कुछ मामलों में लोगों को ब्लैकमेल कर भी उनके बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है।
विदेश से हो रहा नेटवर्क ऑपरेट
एजेंसियों की एक विस्तृत जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं। चीन, मलेशिया, म्यांमार, कंबोडिया और पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटर इन गतिविधियों को निर्देशित कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ये विदेशी नेटवर्क स्थानीय लोगों को भर्ती कर उनसे बैंक खाते खुलवाते हैं और फिर उन्हीं खातों के जरिए अवैध लेन-देन किया जाता है।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
अधिकारियों को आशंका है कि इस तरह लॉन्ड्रिंग किए गए पैसे का इस्तेमाल अलगाववादी और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जा सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं।
जांच एजेंसियां लगातार संदिग्ध खातों और लेन-देन पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।















