देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार यूनियन बजट पेश करते हुए एक बड़ी और ऐतिहासिक परंपरा को तोड़ने जा रही हैं। आजादी के बाद से करीब 75 सालों से चली आ रही बजट व्यवस्था में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार बजट भाषण के पार्ट बी में सिर्फ टैक्स से जुड़े ऐलान या छोटी नीतियों की बात नहीं होगी, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य का पूरा रोडमैप सामने रखा जाएगा। इसे अर्थशास्त्रियों और बाजार दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की छोटी और लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति साफ तौर पर समझ में आएगी।
अब तक बजट भाषण के पार्ट ए में सरकार की बड़ी योजनाएं, विकास से जुड़े लक्ष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अहम घोषणाएं होती थीं। वहीं पार्ट बी आमतौर पर डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में बदलाव और कुछ नीतिगत फैसलों तक ही सीमित रहता था। लेकिन इस बार यह परंपरा बदलने जा रही है।
इस बार पार्ट बी में शॉर्ट टर्म प्राथमिकताओं के साथ-साथ लॉन्ग टर्म विजन पर भी खास जोर दिया जाएगा। भारत 21वीं सदी के अगले दौर में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में बजट के जरिए देश की आंतरिक ताकतों और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को प्रमुखता से पेश किया जाएगा।
बजट भाषण में बड़ा बदलाव?
यह बदलाव इसलिए खास है क्योंकि अर्थशास्त्री और निवेशक अब सिर्फ टैक्स राहत या नई दरों पर नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक रोडमैप पर नजर रखेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्ट बी में भारत की मौजूदा क्षमताओं, घरेलू मजबूतियां और आगे की संभावनाओं का विस्तार से जिक्र होगा।
यह कदम सरकार की सोच को दिखाएगा कि कैसे भारत वैश्विक मंच पर मजबूत भूमिका निभा सकता है। बाजारों में इस बदलाव को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की दिशा स्पष्ट होगी।
निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं। 2019 में अपना पहला बजट पेश करते हुए उन्होंने पुरानी परंपरा तोड़ी थी। दशकों से चली आ रही लेदर ब्रिफकेस की जगह उन्होंने लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही-खाता इस्तेमाल किया था। पिछले चार साल से बजट पूरी तरह पेपरलेस है, यानी टैबलेट पर पेश किया जाता है। इस बार भी यही तरीका जारी रहेगा।
कितना है इस साल का कैपिटल एक्सपेंडिचर?
सरकार ने फिस्कल 2026 (India fiscal discipline and growth) में जीडीपी के 4.5 फीसदी से कम घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब बाजार की नजर फिस्कल 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी कम करने की दिशा पर है। क्या सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए स्पष्ट फिस्कल डेफिसिट का नंबर देगी, यह देखना अहम होगा।
इस वित्त वर्ष के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) का बजट 11.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। निजी क्षेत्र अभी सतर्क है, ऐसे में सरकार कैपेक्स पर फोकस जारी रखेगी। उम्मीद है कि नए बजट में कैपेक्स टारगेट में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और अर्थव्यवस्था में गति आएगी।
जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और प्रमुख योजनाओं पर भी नजर
बजट में फिस्कल 2027 के लिए नाममात्र जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बताया जाएगा। ये आने वाले समय की महंगाई की दिशा बताएगा। कई अनुमानों के अनुसार, सरकार 10.5 से 11 फीसदी के बीच नाम मात्र जीडीपी ग्रोथ का प्रोजेक्शन दे सकती है।
इसके अलावा प्रमुख योजनाओं जैसे पीएम ग्राम सड़क योजना (जीआरएएमजी) पर खर्च, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन पर भी सबकी नजर रहेगी। सरकार इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर ग्रामीण और शहरी विकास को संतुलित करने की कोशिश करेगी।
















