सरकारी विभागों के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) आज अदालत में पेश करेगी। इस मामले में एसीबी ने कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि 18 सरकारी विभागों के बैंक खाते चंडीगढ़ की अलग-अलग शाखाओं में खोले गए थे। अब कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि खाते पंचकूला की बजाय चंडीगढ़ में ही क्यों खोले गए और इसके पीछे क्या वजह थी।
बैंक कर्मचारियों पर भी शक
सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े घोटाले में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों के खाते खोलने में मदद की और नियमों का गलत इस्तेमाल किया। सरकारी खातों से पैसे निकालकर इन्हें फर्जी फर्मों में ट्रांसफर किया जाता था। जरूरत पड़ने पर रकम वापस डाल दी जाती थी, ताकि किसी को शक न हो।
बताया जा रहा है कि खाते खोलने से लेकर फंड ट्रांसफर तक की जिम्मेदारी बैंक कर्मचारियों पर थी। वहीं, इस पूरे खेल में ‘बीच की कड़ी’ यानी बिचौलियों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
निजी लोगों और अफसरों की मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस घोटाले को अंजाम देने में निजी लोगों की बड़ी भूमिका रही है। आरोप है कि उन्होंने सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें लालच दिया और अपने मुताबिक काम करवाया।
बताया जा रहा है कि उन्हीं के कहने पर खातों को खास शाखाओं में खुलवाया गया। इसके बाद सरकारी पैसे को फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर शेयर बाजार और अन्य जगहों पर निवेश कर घुमाया जाता था।
अब एसीबी इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच के दायरे में विभागीय अधिकारी, बैंक कर्मचारी और निजी कंपनियों से जुड़े लोग भी आ सकते हैं। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपियों से रिमांड लेकर पूछताछ की जाएगी, जिससे इस बड़े घोटाले में और खुलासे होने की संभावना है।
















