अगर किसी ने आपको चेक दिया और बैंक में जमा करने पर वह बाउंस हो गया, तो जाहिर है आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऊपर से अगर चेक देने वाला व्यक्ति फोन उठाना भी बंद कर दे, तो स्थिति और मुश्किल हो जाती है। ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है। भारत में चेक बाउंस से जुड़े कानून आपके अधिकारों की रक्षा करते हैं।
आप कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपनी रकम वापस ले सकते हैं। हालांकि इसके लिए तय नियमों और समय-सीमा का सख्ती से पालन करना जरूरी है। अगर आप निर्धारित डेडलाइन चूक जाते हैं, तो मामला कमजोर पड़ सकता है और आपका कानूनी अधिकार प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय रहते सही कदम उठाना बेहद अहम है।
चेक बाउंस केस एक्ट क्या है?
भारत में किसी को बाउंस चेक देने के खिलाफ एक कानून है, जो वास्तव में अपराध माना जाता है। इसे नेगोशियेबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की सेक्शन 138 कहा जाता है। यह काफी सरल है। अगर किसी ने आपको चेक दिया और वह बाउंस हो गया क्योंकि उनके खाते में पर्याप्त राशि नहीं थी, तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। दोषी व्यक्ति को जेल, जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आपको तेजी से कदम उठाने होंगे, क्योंकि इस कानून में कुछ निश्चित समयसीमा तय की गई है। अगर समय पर कार्रवाई नहीं की, तो आपका अधिकार खो सकता है।
चेक बाउंस होने पर क्या होता है?
जब आप चेक बाउंस का मामला कोर्ट में दर्ज करते हैं और कोर्ट उस व्यक्ति को दोषी पाता है, तो दोषी व्यक्ति जेल जा सकता है। इसमें अधिकतम 2 साल तक की सजा काटनी पड़ सकती है। उसे चेक की राशि का दोगुना जुर्माना देना पड़ सकता है। या दोनों यानी जेल और जुर्माना। एक अहम बात भी समझ लें, भले ही बाद में वह व्यक्ति आपको पैसा चुका दे, तब भी उसे सजा हो सकती है। चेक बाउंस होने के समय अपराध पहले ही हो चुका होता है।
लोग सबसे बड़ी गलतियां क्या करते हैं
- बहुत ज्यादा इंतजार करना: कुछ लोग सोचते हैं कि मैं अगले महीने नोटिस भेज दूंगा। यह एक बुरा आइडिया है। आपके पास सिर्फ 30 दिन हैं। उन्हें बर्बाद न करें।
- गलत नोटिस लिखना: आपके नोटिस में खास बातें लिखी होनी चाहिए। चेक नंबर। अमाउंट। बाउंस होने की तारीख। अगर आप ये डिटेल्स भूल जाते हैं, तो आपका केस कमजोर हो जाता है।
- जरूरी पेपर्स खोना: हमेशा हर चीज की कॉपी रखें। चेक। बैंक पेपर। आपने जो नोटिस भेजा था। आपको कोर्ट में इन सबकी जरूरत पड़ेगी।
- सब कुछ अकेले करने की कोशिश करना: ये केस थोड़े मुश्किल होते हैं। एक छोटी सी गलती और आप हार जाते हैं। एक प्रोफेशनल एक्सपर्ट से मदद लेना समझदारी है।
















