‘दीपावली’ अब विश्व धरोहर का प्रकाश! भारत के ‘पर्वों के राजा’ को UNESCO का सम्मान:
भारत के सबसे बड़े और सबसे प्रिय त्योहार दीपावली को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने आधिकारिक तौर पर अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) की प्रतिष्ठित सूची में शामिल कर लिया है.यह न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया भर में फैले उन करोड़ों लोगों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो इस ‘पर्वों के राजा’ को मनाते हैं.
क्यों मिली यह ऐतिहासिक पहचान:
UNESCO की विशेषज्ञ समिति ने दीपावली को इस सूची में शामिल करने का फैसला इसकी सांस्कृतिक गहराई, सामाजिक एकता के महत्व और मानवता को दिए गए संदेश के कारण लिया है.अखंड सामाजिक महत्व: दीपावली केवल रोशनी का त्योहार नहीं है, यह अंधकार पर प्रकाश की जीत, बुराई पर अच्छाई की विजय, और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। यह पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देता है.कला और शिल्प का संरक्षण: इस दौरान मिट्टी के दिए (दीपक), रंगोली, पारंपरिक मिठाइयाँ और स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए सजावटी सामानों का इस्तेमाल होता है, जो पारंपरिक कलाओं और शिल्प को जीवित रखता है.व्यापक पहुँच: भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जैसे कि बंगाल में काली पूजा, महाराष्ट्र में लक्ष्मी पूजन, और दक्षिण भारत में नरक चतुर्दशी, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है.
अमूर्त धरोहर क्या है:अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर वे प्रथाएँ, अभिव्यक्ति, ज्ञान और कौशल होते हैं जिन्हें समुदाय, समूह और व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में पहचानते हैं. यह सूची उन परंपराओं को संरक्षित करने में मदद करती है, जो लिखित या भौतिक नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से या अभ्यास के माध्यम से हस्तांतरित होती हैं.
- भारत के लिए इसका क्या महत्व है: वैश्विक पहचान और संरक्षण: UNESCO की मुहर लगने से दीपावली को अब एक वैश्विक त्योहार के रूप में मान्यता मिली है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके संरक्षण और प्रचार के लिए नए रास्ते खोलेगा.पर्यटन को बढ़ावा: यह सम्मान सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे अधिक विदेशी पर्यटक भारत आकर इस शानदार उत्सव का अनुभव कर सकेंगे.गौरव की अनुभूति: यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर देशवासियों के लिए गर्व करने का एक बड़ा कारण है.दीपावली अब कुंभ मेला और कोलकाता की दुर्गा पूजा जैसी भारत की अन्य प्रमुख अमूर्त धरोहरों की श्रेणी में शामिल हो गई है। यह घोषणा दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति सिर्फ उसकी इमारतों में नहीं, बल्कि उसकी जीवित और सांस लेती हुई परंपराओं में समाई है.
















