सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI जेनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार ने नए नियम जारी किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि ये नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे।
सरकार का कहना है कि एआई तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग और उससे जुड़े खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। ऐसे में YouTube, Instagram, Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म पर AI से बनी फोटो या वीडियो शेयर करने वालों को सावधान रहने की जरूरत है। छोटी सी लापरवाही भी अकाउंट सस्पेंड या स्थायी रूप से बंद होने का कारण बन सकती है।
AI कंटेंट की जानकारी देना होगा अनिवार्य
नई गाइडलाइन के मुताबिक, इंटरनेट पर अपलोड किए जाने वाले किसी भी AI या कंप्यूटर जनरेटेड कंटेंट के बारे में स्पष्ट रूप से बताना जरूरी होगा कि वह कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है। पारदर्शिता नहीं रखने पर कार्रवाई की जा सकती है।
डीपफेक हटाने की 3 घंटे की समय-सीमा
सरकार ने निर्देश दिया है कि किसी भी आपत्तिजनक या भ्रामक डीपफेक कंटेंट की पहचान होने पर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। नियमों का पालन न करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म और यूजर दोनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
तीन बड़े बदलाव लागू
नए नियमों में सरकार ने तीन अहम बदलाव किए हैं, जिनका मकसद ऑनलाइन गलत सूचना, फर्जी वीडियो और एआई के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।
ऐसे में अगर आप भी AI जेनरेटेड कंटेंट शेयर करते हैं, तो पहले इन नियमों को समझ लें, वरना आपका सोशल मीडिया अकाउंट खतरे में पड़ सकता है।
3 बड़े बदलाव
- AI जेनरेटेड कंटेंट को लेकर सरकार ने नए नियम में बताया कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने वाले ऐसे कंटेंट का लेबल दिखाना अनिवार्य है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन लेबल को नहीं छिपा सकती है। किसी इमेज या वीडियो पर एक बार AI का लेबल लग गया तो वो नहीं हटाया जाएगा।
- सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वो AI जेनरेटेड कटेंट, डीपफेक, एआई द्वारा बनाए गए अश्लील कंटेंट (फोटो और वीडियो) को वेरिफाई करने के लिए जरूरी टूल्स लेकर आएं।
- इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह भी निर्देश दिया गया है कि वो अपने यूजर्स को हर 3 महीने में ये चेतावनी जारी करें कि एआई के गलत इस्तेमाल पर सजा या जुर्माना हो सकता है।
AI जेनरेटेड कंटेंट की स्पष्ट परिभाषा
नए नियम में AI जेनरेटेड या SGI कंटेंट को स्पष्ट रूप से पारिभाषित किया गया है। इसमें सरकार ने कुछ कैटेगरी को No Go जोन में रखा है यानी इन कंटेंट पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। No Go जोन में बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट, फर्जी डॉक्यूमेंट या फेक इलेक्ट्रॉनिक्स रिकॉर्ड, हथियार, गोला-बारूद से संबंधित जानकरी, डीपफेक फोटो और वीडियो को रखा गया है। इस तरह के कंटेंट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
MeitY ने अपनी अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी यूजर या सोशल मीडिया कंपनी इन नए नियमों का पालन नहीं करते हैं तो एक्शन लिया जाएगा। ऐसे पोस्ट को तुरंत हटा लेना चाहिए, नहीं तो सोशल मीडिया यूजर का अकाउंट सस्पेंड किया जा सकता है। ऐसे गंभीर मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपकी पहचान पुलिस को दे सकता है और आपको जेल भी हो सकती है।
कानूनी दायरे में AI से बने कंटेंट
सरकार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए ये बड़ा कदम उठाया है। IT एक्ट 2021 में जरूरी बदलाव किए गए हैं, जिन्हें 20 फरवरी 2026 से लागू किया जाएगा। एआई से बने फोटो, वीडियो और सिंथेटिक मीडिया को कानूनी दायरे में रखा गया है। इसमें किसी के आवाज के साथ छेड़छाड़, डीपफेक वीडियो को रखा गया है। हालांकि, सरकार ने बेसिक एडिटिंग वाले फोटो और वीडियो को इस दायरे में नहीं रखा है। ऐसे कंटेंट पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
बढ़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
MeitY ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अगर, सरकार ने किसी कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दिया है, तो यह कार्रवाई 24 घंटे की जगह 3 घंट में करना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसी कोडिंग यूज करने के लिए कहा है कि ताकि यह पता चल सके कि इसे किस प्लेटफॉर्म से बनाया गया है। सरकार ने बच्चों से फोटो-वीडियो, सरकारी डेटा और हिंसा से जुड़े कंटेंट पर तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। एआई कंटेंट सोशल मीडिया पर शेयर करने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की होगी।
















