भविष्य की बचत के उद्देश्य से ली गई बीमा पॉलिसी को बीमा कंपनी द्वारा लैप्स करना ग्राहक के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के लिए महंगा साबित हुआ। उपभोक्ता फोरम ने सख्त रुख अपनाते हुए बीमा कंपनी को वादिनी को कुल 1 लाख 19 हजार 588 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
मामला शहर के सोनिया नगर निवासी संगीता से जुड़ा है। उन्होंने उपभोक्ता फोरम में दायर वाद में बताया कि उन्होंने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से स्मार्ट बचत योजना के तहत 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी की वार्षिक किस्त 50,794 रुपये तय थी। पॉलिसी की अवधि 20 वर्ष की थी, जबकि प्रीमियम का भुगतान 15 वर्षों तक किया जाना था।
वादिनी के अनुसार, उन्होंने समय पर दो किस्तें जमा कर दी थीं। इसके बाद अचानक गंभीर बीमारी के कारण वह आर्थिक संकट में फंस गईं और मार्च में निर्धारित तीसरी किस्त समय पर जमा नहीं कर सकीं। स्थिति में सुधार होने पर उन्होंने बीमा कंपनी से पेनाल्टी के साथ किस्त जमा करने और पॉलिसी को दोबारा चालू करने का अनुरोध किया। इस पर कंपनी ने नवीनीकरण फॉर्म भरवाकर उसे स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया।
कुछ समय बाद बीमा कंपनी ने वादिनी को सूचित किया कि उनकी पॉलिसी लैप्स हो चुकी है और इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता। जब वादिनी ने जमा की गई राशि वापस मांगी, तो कंपनी ने भुगतान से इनकार कर दिया। वादिनी का कहना था कि बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पांच वर्ष के भीतर अर्थदंड के साथ भुगतान करने पर पॉलिसी पुनः चालू की जा सकती है, इसके बावजूद कंपनी ने उनकी बात नहीं मानी।
थक-हारकर वादिनी ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। नोटिस जारी होने पर बीमा कंपनी ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि पॉलिसी को पुनर्जीवित करने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी, इसलिए किसी तरह का भुगतान संभव नहीं है। वहीं, वादिनी के वरिष्ठ अधिवक्ता केपी वर्मा ने दलील दी कि वादिनी ने समय पर दो किस्तें जमा की थीं और तीसरी किस्त से पहले वह गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं। केवल एक किस्त न भर पाने के आधार पर पॉलिसी लैप्स करना न्यायसंगत नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम और सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्रा ने बीमा कंपनी के सभी तर्क खारिज कर दिए। आयोग ने वादिनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।
















