हिंसा प्रभावित मणिपुर में घर छोड़ने को मजबूर हुए परिवारों के लिए सरकार के आवास संबंधी कदमों पर लोकसभा में चर्चा हुई. राज्य में लंबे समय से जारी अशांति के कारण बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित जगहों पर रहने को मजबूर हैं. इन्हीं विस्थापित नागरिकों के लिए क्या कोई खास आवास योजना शुरू की गई है—इसको लेकर सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने केंद्र से जवाब मांगा.
मणिपुर में जारी हिंसा और अस्थिरता के बीच विस्थापित हुए परिवारों के लिए आवास निर्माण की स्थिति पर सरकार ने लोकसभा में विस्तृत जानकारी दी. लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण हजारों लोग अपने घरों से दूर अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं. इन्हीं प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आवास सहायता उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं—इसको लेकर सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने केंद्र से जवाब मांगा था. उन्होंने यह भी पूछा कि अब तक कितने मकान तैयार हो चुके हैं, निर्माण किन क्षेत्रों में हो रहा है और केंद्र सरकार ने कुल कितनी धनराशि जारी की है.सरकार की ओर से बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी और नई PMAY-U 2.0 के तहत मणिपुर में 56,045 आवास स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से 20,591 घरों का निर्माण पूरा होकर लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है, जबकि 49,846 मकान अभी निर्माणाधीन हैं. केंद्र ने स्पष्ट किया कि भूमि आवंटन और बसावट से जुड़े निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. केंद्र की भूमिका योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की है, ताकि शहरी गरीबों के साथ-साथ हिंसा प्रभावित परिवारों को भी स्थायी और सुरक्षित आवास मिल सके.
सरकार ने जानकारी दी है कि शहरी आवास प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी को उन्नत रूप देकर PMAY-U 2.0 लागू किया गया है.यह नई व्यवस्था 1 सितंबर 2024 से प्रभावी है और इसके दायरे में एक करोड़ शहरी परिवारों को शामिल किया गया है. नई नीति में घर आवंटन पूरी तरह मांग-आधारित होगा, यानी पात्रता और चयन की प्रक्रिया राज्य सरकारों तथा स्थानीय निकायों द्वारा तय की जाएगी. इसके साथ ही इच्छुक परिवार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं भी आवेदन कर सकते हैं.
मणिपुर में इस योजना के लिए वित्तीय आवंटन पर भी सरकार ने आंकड़े साझा किए। राज्य को अब तक कुल ₹582.36 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिनमें से ₹468.53 करोड़ का उपयोग हो चुका है. पूरी परियोजना के लिए ₹867.95 करोड़ तक की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे हिंसा प्रभावित और शहरी गरीब परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है.
















