रायगढ़। शहर में धार्मिक आस्था के अपमान को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। टिल्लू शर्मा के खिलाफ दर्ज गंभीर प्रकरण के बावजूद उसकी गिरफ्तारी न होना समाज के धैर्य की परीक्षा बन गई है। पुलिस की निष्क्रियता और आरोपी को राहत देने की कोशिशों ने लोगों के बीच गहरी नाराजगी और असंतोष पैदा कर दिया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि या तो पुलिस आरोपी को पड़कर उसका पुलिस परेड निकलवाए अथवा वह स्वयं शहर में जनाक्रोश रैली निकालकर आरोपी को बचाने के विरोध में विरोध का स्वर बुलंद करेंगे

जानकारी के अनुसार, आरोपी टिल्लू शर्मा अब भी फरार है, जबकि समाज के प्रतिनिधि लगातार पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन और विरोध दर्ज करा रहे हैं। आरोप है कि पुलिस जानबूझकर उसे जमानत का मौका देने के लिए गिरफ्तार नहीं कर रही, जिससे आरोपी को कानून से बच निकलने का अवसर मिल जाए। यह रवैया न केवल न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है बल्कि आस्था के अपमान के खिलाफ चल रहे जनसंघर्ष को भी चुनौती देता है।
शहर के विभिन्न संगठनों, धार्मिक समूहों और युवा मोर्चों ने अब एक बार फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के घेराव और महानगर व्यापारी संघ के समर्थन से रैली निकालने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर आस्था का अपमान कर बच नहीं पाओगे का नारा तेजी से फैल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
कानून के आगे सब समान — फिर देरी क्यों?

टिल्लू शर्मा जैसे मामलों में पुलिस का ढुलमुल रवैया न केवल कानून की गंभीरता को कमजोर करता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि आस्था का अपमान कर भी लोग बच सकते हैं। जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे अपराधों पर तत्काल कार्रवाई के उदाहरण मौजूद हैं, रायगढ़ पुलिस की चुप्पी और विलंब न्याय की भावना के विपरीत है। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस आरोपी के बचाव में खड़ी है या जनता की आस्था की रक्षा में?
















