भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। गुरुवार को यहां 338 नए मरीज पाए गए, जबकि अभी भी 32 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। अब तक लगभग 2800 मरीज सामने आ चुके हैं।

भागीरथपुरा के स्वास्थ्य केंद्र में सुबह से लेकर देर रात तक मरीजों की भीड़ रही। यहां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग लोग अपनी समस्याओं के साथ पहुंचे हैं, जिनमें से अधिकांश मरीज उल्टी और दस्त की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इस संकट के चलते क्षेत्र के निवासियों में आक्रोश व्याप्त है, यहां तक कि कुछ परिवारों के सभी सदस्य बीमार पड़े हैं।

यहाँ पानी के टैंकर तो भेजे जा रहे हैं, लेकिन लोग उसका पानी इस्तेमाल करने से डर रहे हैं और आरओ का पानी मंगवाकर पी रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की 21 टीमें बनाकर घर-घर जाकर उबला पानी पीने व बाहर का खाना न खाने की सलाह दी है।

गुरुवार को 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से करीब 338 मरीज मिले, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। अब तक कुल 272 मरीजों को भर्ती किया गया है, इनमें से 71 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। अभी विभिन्न अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती है, जिनमें 32 मरीज आईसीयू में है।

पांच नंबर जोन में बढ़ी जल संबंधी शिकायतें
भागीरथपुरा में दूषित पानी से दर्जनों मौतों के बाद अधिकारियों ने जल संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। साल के पहले दिन दोपहर 2:30 बजे तक इंदौर-311 हेल्पलाइन पर पिछले 24 घंटे में 206 जल संबंधी शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें सबसे अधिक शिकायतें जोन नंबर पांच से आईं।
















