अगर आप हर साल चार्टर्ड अकाउंटेंट के चक्कर लगाने और जटिल टैक्स फॉर्म भरने से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 पेश कर दिए हैं, जो पुराने 1956 के नियमों की जगह लेंगे। इन नए नियमों का मकसद टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान और कम उलझन भरा बनाना है। ड्राफ्ट जारी होने का मतलब है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर इन नियमों को लागू करने की तैयारी में है।
*नए इनकम टैक्स रूल्स की अहम बातें*
नए नियमों के तहत अब सैलरी या बैंक ब्याज की जानकारी मैन्युअली भरने की जरूरत नहीं होगी। पैन कार्ड के जरिए आपकी जानकारी अपने आप सिस्टम में आ जाएगी और टैक्सपेयर्स को सिर्फ उसे वेरिफाई कर सब्मिट करना होगा।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से टैक्स स्लैब को लेकर होने वाली उलझनें कम होंगी और मिडिल क्लास को बड़े डिडक्शन के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अगर टैक्स रिटर्न भरते समय कोई टैक्स रिजीम नहीं चुनी जाती है, तो सिस्टम अपने आप न्यू टैक्स रिजीम को लागू कर देगा।
इसके अलावा, अभी तक ITR-1 और ITR-2 जैसे अलग-अलग फॉर्म चुनने पड़ते थे, लेकिन 2026 से एक स्मार्ट ITR फॉर्म आएगा, जो आपकी आय के स्रोत के आधार पर खुद सही फॉर्म का चुनाव कर लेगा।
स्मार्ट प्रोसेसिंग सिस्टम के चलते अब टैक्स रिफंड में भी तेजी आएगी और रिफंड हफ्तों की बजाय कुछ ही दिनों में सीधे बैंक खाते में पहुंच जाएगा।
कब से लागू होंगे ये नियम?
बजट 2026 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि सरकार नए नियमों को 1 अप्रैल, 2026 से लागू करने जा रही है. यानी इस साल से टैक्स फाइल करना किसी ऐप पर ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने जैसा आसान हो सकता है
आपको क्या चुनना चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल इन दिनों रिजीम के सिलेक्शन को लेकर हो रहा है, कि भाई सब कुछ अच्छा है पर चुनें किसे? तो चलिए आसान भाषा में आपके इस कंफ्यूजन को कुछ हद तक कम कर देते हैं.
पुरानी रिजीम चुनें
अगर आपने बड़ा होम लोन लिया है, बच्चों की बड़ी स्कूल फीस देते हैं और एलआईसी/पीपीएफ में निवेश करते हैं, तो पुरानी रिजीम में बने रहना अच्छा ऑप्शन है क्योंकि इसमें 80 C से 80 U तक की डिडक्शन का फायदा आप उठा सकते हैं.
















