सोना-चांदी में तेजी की उम्मीद कर रहे निवेशकों को सोमवार को बड़ा झटका लगा। सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत एक ही दिन में 9,000 रुपये गिरकर 2.56 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई। वहीं सोने की कीमत भी 2,950 रुपये टूटकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।
इस अचानक आई गिरावट से बाजार में हलचल बढ़ गई है और निवेशकों की नजर अब आगे की कीमतों की चाल पर टिकी हुई है।
अचानक क्यों आई गिरावट ?
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे कमजोर वैश्विक संकेत, मजबूत डॉलर और मुनाफावसूली बड़ी वजह रहे हैं। अगर चांदी की बात करें तो इसकी कीमत 9,000 रुपए यानी करीब 3.4 प्रतिशत गिरकर (silver price crash) 2,56,500 रुपए प्रति किलो (सभी करों सहित) रह गई। इससे पहले शुक्रवार को चांदी 2,65,500 रुपए (silver rate tpday) प्रति किलो पर बंद हुई थी।
वहीं 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना लगातार तीसरे दिन गिरावट में रहा। सोमवार को यह 2,950 रुपए यानी करीब 1.81 प्रतिशत टूटकर (gold price crash) 1,60,250 रुपए प्रति 10 ग्राम (gold ratre today) पर आ गया।
बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं में तेज तेजी आई थी, इसलिए अब निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं और पैसा दूसरी सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं।
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।
परमार के मुताबिक घरेलू बाजार में अब तेजी की रफ्तार भी कमजोर पड़ती दिख रही है। वित्त वर्ष के आखिर से पहले बाजार में लंबे समय से चल रहे सौदों की कटान हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बन रहा है।
FOMC की बैठक पर टिकी है नजर
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक प्रवीण सिंह का कहना है कि मजबूत डॉलर और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने सोने पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद भी कमजोर हुई है।
फिलहाल निवेशकों की नजर फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की आने वाली बैठक पर है। इसके अलावा अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों जैसे आंकड़ों पर भी बाजार की खास नजर रहेगी, क्योंकि इन्हीं से वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा के संकेत मिलेंगे।
















