छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। यहां तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। राज्य में लगातार नक्सलियों के सरेंडर करने का सिलसिला जारी है।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान संगीता कुंजाम, संजू और लखमू के रूप में हुई है। तीनों ने परतापुर थाने में बिना हथियार के सरेंडर किया। अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति का असर अब साफ दिख रहा है, जिसके चलते नक्सली संगठन से जुड़े लोग लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
पहले भी कई नक्सलियों ने छोड़ा था साथ
इससे पहले कांकेर जिले में दो दिनों के भीतर राजनांदगांव–कांकेर बॉर्डर डिवीजन के 5 माओवादी कैडर और मिलिट्री कंपनी-05 के एक सदस्य ने भी आत्मसमर्पण किया था। इनमें कुछ नक्सलियों पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित था।
बड़े नक्सली नेताओं का असर हुआ कम
नक्सल कमांडर पापराव के सरेंडर के बाद राज्य में बड़े नक्सली नेताओं का प्रभाव काफी कम हो गया है। यही वजह है कि अब प्रदेश में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
हथियारों के साथ भी हुआ सरेंडर
हाल ही में कुछ नक्सलियों ने हथियारों के साथ भी आत्मसमर्पण किया था। इनमें सीएम मंगेश पोडियमी, एसीएम गणेश वीके, मंगती जुर्री, हिडमे मरकाम उर्फ सुनीता, राजे और स्वरूपा उसेंडी शामिल हैं। ये अपने साथ एक एसएलआर और दो 303 राइफल लेकर पहुंचे थे।
आईजी की अपील
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बचे हुए नक्सलियों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि जो भी नक्सली शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत हर संभव मदद दी जाएगी।
गौरतलब है कि पिछले 26 महीनों में 2700 से ज्यादा माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
















