मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक कुवैत के एक सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें 10 सैनिक घायल हो गए। वहीं इजरायल की कंपनी ADAMA ने भी दावा किया है कि उसके केमिकल प्लांट को मिसाइल या उसके मलबे से नुकसान पहुंचा है।
दक्षिणी इजरायल के केमिकल प्लांट पर भी हमला
कंपनी के अनुसार, दक्षिणी इजरायल स्थित मख्तेशिम प्लांट को निशाना बनाया गया। हालांकि इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। बताया जा रहा है कि यह प्लांट चीनी स्वामित्व वाली सिंजेंटा ग्रुप का हिस्सा है। कंपनी फसल सुरक्षा और केमिकल उत्पाद बनाती है।
कूटनीतिक प्रयास तेज
इधर, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। रविवार को तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक इस्लामाबाद में शुरू हुई। अधिकारियों का मानना है कि यह बैठक दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत की दिशा में अहम कदम हो सकती है।
पाकिस्तान-ईरान के बीच बातचीत
बैठक से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत की। पांच दिनों में यह उनकी दूसरी बातचीत थी। इसमें दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और भरोसा बहाल करने पर जोर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ पिछली परमाणु वार्ताओं के दौरान हुए हमलों पर नाराजगी जताई है। तेहरान का कहना है कि बातचीत और हमले साथ-साथ चलना विरोधाभासी है, जिससे अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है।
रियाद के बाद इस्लामाबाद में बैठक
इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक पहले से तय प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत इस महीने रियाद में हुई थी। पहले इसे अंकारा में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका के चलते स्थान बदलकर इस्लामाबाद कर दिया गया।
चीन ने भी इस कूटनीतिक पहल का समर्थन किया है और ईरान को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है।
तेहरान की मांगें क्या हैं?
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने इस्लामाबाद के जरिए अमेरिका को अपनी शर्तें भेजी हैं। इनमें युद्ध खत्म करना, नुकसान की भरपाई, भविष्य में हमले न करने की गारंटी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अपने प्रभाव को मान्यता देना शामिल है।
अगले 72 घंटे अहम
अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं के आधार पर तय होगा कि यह कूटनीतिक पहल किसी ठोस नतीजे तक पहुंचती है या नहीं। फिलहाल नजर वाशिंगटन और तेहरान के फैसलों पर टिकी है।
















