छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों की नई सूची जारी की है। इसके तहत कर्मचारी अब दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद समेत देश के अन्य राज्यों के 66 बड़े निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। इस सूची में देश के कई नामी अस्पतालों को शामिल किया गया है। हालांकि, प्रदेश में तैनात कर्मचारियों को इन अस्पतालों में इलाज कराने के लिए रेफरल लेटर लेना जरूरी होगा।
मेदांता से अपोलो तक कई बड़े अस्पताल शामिल
नई सूची में मेदांता, सर गंगाराम अस्पताल, शेल्बी, जसलोक, सीएमसी, कोकिलाबेन, शंकर नेत्रालय और अपोलो जैसे बड़े अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। दूसरे राज्यों में इलाज की यह सुविधा कर्मचारियों के लिए काफी उपयोगी है, क्योंकि कई बार गंभीर बीमारी में बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
लैब प्रभारी को नोटिस, मांगा जवाब
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, अटल आरोग्य लैब के प्रभारी जेपी मेश्राम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो बनाने में किन कर्मचारियों की भूमिका थी और ड्यूटी के दौरान रील बनाने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई तय की जाएगी।
मरीजों की निजी जानकारी तो नहीं हुई वायरल?
स्वास्थ्य विभाग की जांच में मरीजों की गोपनीयता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी यह देख रहे हैं कि वायरल वीडियो में किसी मरीज का ब्लड सैंपल, जांच रिपोर्ट, नाम-पता या दूसरी निजी जानकारी तो दिखाई नहीं दे रही है। अगर वीडियो में मरीजों से जुड़ी कोई संवेदनशील जानकारी सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
रोजाना सैकड़ों सैंपलों की होती है जांच
अटल आरोग्य लैब जिला अस्पताल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों के सैंपल की जांच की जाती है। विभाग के अनुसार, लैब में 130 से ज्यादा तरह की बीमारियों की जांच मुफ्त की जाती है। ऐसे में यहां काम करने वाले कर्मचारियों से ड्यूटी के दौरान सावधानी बरतने और मरीजों की निजी जानकारी सुरक्षित रखने की उम्मीद की जाती है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज ने कहा है कि अस्पताल और लैब जैसे संवेदनशील स्थान पर ड्यूटी के दौरान इस तरह की गतिविधियां करना लापरवाही माना जा सकता है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग वायरल वीडियो और उससे जुड़े पूरे मामले की जांच कर रहा है।
















