भारतमाला प्रोजेक्ट और रेल परियोजना की जमीन में करोड़ों का मुआवजा फर्जीवाड़ा होने के बाद राज्य सरकार ने अब कलेक्टर गाइडलाइन बड़ा बदलाव किया है। अब जमीन अधिग्रहण के बाद उसके मुआवजे की गणना वर्गमीटर के बजाय हेक्टेयर में की जाएगी।
इतना ही नहीं, जिस जमीन का हितग्राहियों को मुआवजा देना होगा वो डायवर्सन की गई हो या नहीं की गई हो, इससे मुआवजे की राशि पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा यानी डायवर्टेड और बिना डायवर्सन की जमीन की कीमत भी एक ही होगी।
यहां बता दें, पहले डायवर्सन जमीन का मुआवजा बिना डायवर्सन वाली जमीन की तुलना में करीब ढाई गुना ज्यादा होता था, लेकिन अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा।
ऐसे समझें… अधिग्रहण के नियम को
अधिग्रहण नियमों के अनुसार अधिग्रहित की गई जमीन 500 वर्गमीटर से कम है तो मुआवजा अधिक मिलता है और जमीन 500 वर्गमीटर से ज्यादा है तो मुआवजा कम मिलता है।
आइए, इसे ऐसे समझते हैं… मान लीजिए एक एकड़ जमीन का मुआवजा 20 लाख रुपए होता है।
इसी जमीन को अगर टुकड़ों में बांटकर 500 वर्गमीटर से कम कर दिया जाए तो मुआवजा 1 करोड़ तक हो जाएगा। क्योंकि एकमुश्त जमीन अधिग्रहित होने पर उसकी कीमत अलग होती है और जैसे ही जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दी जाती है तो उसकी कीमत प्रचलित कलेक्टर गाइडलाइन से की जाती है। जो करीब बाजार मूल्य के बराबर हो जाती है। इससे मुआवजा कई गुना बढ़ जाता है। इतना ही नहीं मुआवजे से मिलने वाली राशि टैक्स फ्री होती है। इस वजह से फायदा और बढ़ जाता है।
अब जमीन मुआवजे में नहीं होगा फर्जीवाड़ा- ओपी चौधरी
प्रदेश के वित्त एवं आवास पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी को कहना है कि कैबिनेट में लिए फैसले के अनुसार अब राज्यभर में जमीन मुआवजा में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा। मुआवजे की रकम तय करने में पारदर्शिता ला दी गई है। अब जमीन को टुकड़ों में
















