रायगढ़, 16 जनवरी 2026/
राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर रायगढ़ मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिले में जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण 6 से 15 जनवरी तक चरणबद्ध तरीके से संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत, प्रभारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. बी.पी. पटेल एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री रंजना पैंकरा के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. टी.जी. कुलवेदी, जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा, कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित कुमार शैलेंद्र मंडल, डॉ. केनन डेनियल, आईडीएसपी कार्यक्रम के डीडीएम श्री रामकुमार जांगड़े सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी विकासखंडों से आरएमए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, आरएचओ (पुरुष/महिला), सीएचओ, बीडीएम, डीईओ, पीएडीए तथा जिला व जनपद पंचायत के सदस्यों को समूहवार निर्धारित तिथियों में प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि वायु प्रदूषण का असर अब सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, आंखों में जलन, त्वचा रोग और अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ते प्रदूषण का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ समाज की नींव है, जिससे बीमारियों पर नियंत्रण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव भी कम किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यालयों, शासकीय कार्यालयों, पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। साथ ही आम लोगों से साइकिल या पैदल चलने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील की गई।
अधिकारियों ने बताया कि तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानव जीवन, पर्यावरण, स्वास्थ्य और आजीविका पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। बढ़ता तापमान, असामान्य वर्षा, लू, सूखा, बाढ़, जलस्तर में गिरावट और वायु प्रदूषण भविष्य के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिससे हीट स्ट्रोक, सांस संबंधी रोग, एलर्जी, जलजनित बीमारियों और कुपोषण के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर देखा जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण में रोग निगरानी पोर्टल पर रिपोर्टिंग प्रक्रिया, जलवायु से जुड़ी बीमारियों की पहचान, रोकथाम और आवश्यक उपायों की जानकारी दी गई। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्लास्टिक का कम उपयोग, कचरे का पृथक्करण और पुनर्चक्रण जैसे उपाय अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
















