सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन मेगाबुरु के तहत माओवादी संगठन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। झारखंड में माओवादी सेंट्रल कमेटी के सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा पर अब सुरक्षा एजेंसियों की खास नजर है। उसे पकड़ने के लिए सारंडा में लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
शनिवार को चाईबासा पहुंचे सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि ऑपरेशन मेगाबुरु माओवादियों के खिलाफ एक सुनियोजित और रणनीतिक अभियान है। इसे इस तरह अंजाम दिया गया कि माओवादियों को जवाबी कार्रवाई का कोई मौका न मिले।
उन्होंने बताया कि अभियान के पहले दिन मुठभेड़ में 15 माओवादी मारे गए, जबकि दूसरे दिन दो और माओवादी ढेर हुए। झारखंड राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब एक ही अभियान में 17 इनामी माओवादियों को मार गिराया गया है।
अब बचे माओवादियों पर कार्रवाई तेज
आईजी ने बताया कि पहले चरण में इस इलाके में कुल 65 माओवादी सक्रिय थे, जिनमें से अब करीब 48 बचे हैं। सुरक्षा बलों ने इनकी गतिविधियों पर पूरी निगरानी शुरू कर दी है और जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि झारखंड में सेंट्रल कमेटी का एकमात्र सक्रिय सदस्य मिसिर बेसरा अब सुरक्षा बलों के निशाने पर है। या तो वह गिरफ्तार होगा या फिर हाल में मारे गए माओवादियों जैसा ही अंजाम उसका भी होगा।
इस अभियान की सफलता का श्रेय झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के बेहतर तालमेल को दिया गया है।
आधुनिक हथियारों की बड़ी बरामदगी
आईजी ने बताया कि माओवादियों के पास से चार एके-47, चार इंसास राइफल, तीन एसएलआर, तीन .303 राइफल, बड़ी संख्या में कारतूस और दैनिक उपयोग का सामान बरामद किया गया है। ये हथियार माओवादी संगठन के लिए काफी अहम थे और इनकी बरामदगी से संगठन की कमर टूट गई है।
आईजी साकेत कुमार सिंह ने कहा कि इस अभियान से न सिर्फ झारखंड, बल्कि ओडिशा सरकार को भी बड़ी राहत मिली है। मारे गए माओवादियों में अनल उर्फ पतिराम मांझी, अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा और रापा मुंडा शामिल हैं, जिन पर झारखंड और ओडिशा दोनों राज्यों में भारी इनाम घोषित था।
उन्होंने बताया कि इन माओवादियों की गतिविधियों के चलते झारखंड-ओडिशा सीमा क्षेत्र लंबे समय से प्रभावित था, लेकिन अब यह इलाका माओवाद से लगभग मुक्त हो चुका है।
सरेंडर की अपील
आईजी ने बचे हुए माओवादियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को झारखंड सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा और सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी।

उन्होंने बताया कि फिलहाल झारखंड में करीब 65 माओवादी सक्रिय हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा पश्चिमी सिंहभूम जिले में हैं। आईजी ने साफ कहा कि सरेंडर करने वालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
साकेत कुमार सिंह ने कहा कि कुछ माओवादी नेता युवाओं को गुमराह कर हिंसा के रास्ते पर ले जा रहे हैं, लेकिन हालिया अभियानों ने साफ कर दिया है कि इस रास्ते का अंजाम क्या होता है। सरकार और सुरक्षा बल भटके युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
















