केंद्र सरकार की चार नई श्रम संहिताओं समेत अन्य नीतियों के विरोध में देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों और 100 से अधिक जन संगठनों ने गुरुवार, 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है, जहां कई संगठनों ने बंद को समर्थन दिया है।
रायगढ़ में खदानें बंद रखने का फैसला
रायगढ़ जिले में कोयला खदानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर सकती हैं। संगठनों ने प्रदेश के श्रमिकों से अपील की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। रायगढ़ के साथ-साथ आसपास की खदानों में भी कामकाज प्रभावित रहने की संभावना है। कोयला परिवहन पर भी असर पड़ सकता है।
रायपुर में निकाली गई मशाल रैली
राजधानी रायपुर में बंद से एक दिन पहले कर्मचारी भवन, बूढ़ापारा से मशाल रैली निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बाद में रैली सभा में बदल गई, जहां वक्ताओं ने केंद्र की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई समेत कई शहरों में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। एटक (AITUC), इंटक (INTUC), सीटू (CITU) और एचएमएस (HMS) जैसे संगठनों के सदस्य धरना-प्रदर्शन करेंगे।
हालांकि, राज्य में स्कूल, अधिकांश प्रतिष्ठान और सामान्य आवागमन के सामान्य रहने की संभावना जताई जा रही है। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस बंद को समर्थन नहीं दिया है। इसके बावजूद विभिन्न जिलों में कर्मचारी संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की संभावना है।
ऐसे में आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे जरूरी काम से निकलने से पहले स्थानीय स्थिति की जानकारी जरूर ले लें।
















