सोमवार को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 23 मार्च 2026 को दोपहर करीब 1 बजे 2 अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के भाव में पिछले सत्र के मुकाबले 9.45% की बड़ी गिरावट आई और यह 1,30,837 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को सोना 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, यानी इसमें करीब 13,988 रुपये की कमी आई।
वहीं, 5 मई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत में भी 10.48% की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,03,017 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। पिछले सत्र में चांदी 2,27,470 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, यानी इसमें 24,453 रुपये की गिरावट आई। पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी में लगातार कमजोरी का रुख बना हुआ है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरावट (करेक्शन) देखने को मिल सकती है।
प्रमुख शहरों में सोने के ताजा भाव (प्रति ग्राम)
दिल्ली
यहां 24 कैरेट सोना 14,017 रुपये, 22 कैरेट 12,850 रुपये और 18 कैरेट 10,517 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
मुंबई
मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 14,002 रुपये, 22 कैरेट 12,835 रुपये और 18 कैरेट 10,502 रुपये प्रति ग्राम है।
कोलकाता
कोलकाता में भी कीमतें मुंबई के बराबर हैं। यहां 24 कैरेट 14,002 रुपये, 22 कैरेट 12,835 रुपये और 18 कैरेट 10,502 रुपये प्रति ग्राम है।
चेन्नई
चेन्नई में सोना बाकी शहरों से महंगा है। यहां 24 कैरेट सोना 14,128 रुपये, 22 कैरेट 12,950 रुपये और 18 कैरेट 10,800 रुपये प्रति ग्राम है।
बेंगलुरु
बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 14,002 रुपये, 22 कैरेट 12,835 रुपये और 18 कैरेट 10,502 रुपये प्रति ग्राम पर ट्रेड कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव बना हुआ है। Trading Economics के अनुसार, सोमवार को सोने की कीमत 4,400 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई। लगातार चौथे हफ्ते सोने में बिकवाली का रुख बना हुआ है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है, वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव कम करने के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने की संभावना भी है, जिससे सोने में बिकवाली बढ़ सकती है।
ईरान से जुड़े तनाव भी कम होते नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खुला तो कार्रवाई हो सकती है। वहीं ईरान ने भी पलटवार की बात कही है। इस बीच ट्रेडर्स यह मानकर चल रहे हैं कि साल के अंत तक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, क्योंकि महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
















