रायगढ़ 7 मई। केलो विहार कालोनी का भूमि आवंटन अविभाजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ 1993 में तत्कालीन कलेक्टर हर्षमंदर सिंह ने शहर के प्रथम कालोनी बसाहट की परिकल्पना को साकार करने की सकारात्मक सोच की दृष्टि से शासकीय कर्मचारियों को 10 रु प्रति वर्ग फुट पर भूमि आबंटित किया गया था जिसे सभी हितग्राहियों ने राशि जमाकर अधिकार पत्र भी प्राप्त कर लिया था शासन की औपचारिक कागजी कार्रवाई प्रक्रिया में विलंब होने के और पृथक छत्तीसगढ गठन होने से विभागीय कार्रवाई टलता गया और समय बीतता चला गया फिर केलो विहार सहकारी समिति द्वारा 2023 के कांग्रेस शासन काल में आबंटित शासकीय भूमि का प्रीमियम राशि निर्धारण कर पट्टा वितरण के लिए विभागीय पत्राचार किया गया जिसपर कांग्रेस सरकार द्वारा पत्र जारी करते हुए 1993 में संस्था को भूमि का आधिपत्य सौंपा जाना मानते हुए 1993 की प्रीमियम दर पर गणना की जाकर 2023 तक के भू भाटक, उपकर सहित अन्य करों का समावेश करते हुए साढ़े 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज केलो विहार कालोनी सदस्यों से जमा कराया जाकर भूमि का पट्टा प्रदान करने प्रस्ताव व मार्गदर्शन चाहा गया था जिसपर केलो विहार सहकारी समिति ने सर्वसम्मति से सहमति प्रदान की गई थी उस समय भूमि मूल्य व सभी करों व ब्याज सहित 50 ₹ प्रति वर्ग फुट की दर पर जमीन का निर्धारण हुआ था जो समिति द्वारा मान्य किया गया था पर दुर्भाग्यवश उसी वर्ष 2023 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार चली गई और भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोक दिया पर 2023 चुनाव रायगढ़ विधानसभा से प्रत्याशी रहे ओपी चौधरी के समक्ष चुनाव प्रचार के दौरान केलो विहार सहकारी समिति द्वारा केलो विहार के लंबित भूमि पट्टा वितरण का मामला प्रस्तुत किया गया तब प्रत्याशी रहे ओपी चौधरी ने भाजपा सरकार बनने पर मामले का सुखद पटाक्षेप करने का पुरजोर आश्वासन दिया था फिर ओपी चौधरी जी चुनाव जीत गये और भाजपा की सरकार में वित्त,राजस्व मंत्री भी बन गये अब अपने किये वायदे को पूरा करने की कवायद मे आगे बढ़ रहे रायगढ़ विधायक व वित्त,राजस्व मंत्री केलो विहार कालोनी समिति के मजबूरी का फायदा व अवसर का लाभ उठाने के उद्देश्य से शासकीय कर्मचारियों के आबंटित भूमि पट्टा प्रदान करने में लालचवश 400₹ प्रति वर्ग फुट 30 वर्ष के लीज में देने की प्रक्रिया लागू कर रहे हैं जो कि पूर्णतः गलत और केलो विहार निवासियों के साथ धोखा है।

आगे जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शाखा यादव ने कहा कि भूमि का आवंटन 1993 में हो चुका है जिसका अधिकार पत्र भी हितग्राहियों को दिया जा चुका है फिर अब उसी भूमि को 30 वर्ष के लीज पर 400 ₹ प्रति वर्ग फुट की दर पर देना हितग्राहियों के साथ बेईमानी है क्योंकि 30 वर्ष बाद आगामी दर अनुसार
हितग्राहियों से लीज नवीनीकरण के नाम पर फिर भारी-भरकम राशि वसूली जायेगी जब 1993 में भूमि आवंटित किया गयातब स्थायी पट्टा के अनुरूप भूमि का अधिकार पत्र दिया गया था तब लीज पट्टा प्रदान करने का कोई उल्लेख नहीं था पर अब भाजपा सरकार की नीयत में खोट नजर आ रहा है सरकार उन सरकारी कर्मचारियों के जेब में मेहनत की गाढ़ी कमाई पर डाका डालना चाहती है जो अपने सेवा काल के दौरान कहीं से कर्ज लेकर व वेतन के पैसे से बमुश्किल अपने बच्चों का लालन-पालन करते हुए पढ़ाए लिखाये हैं और अब वृद्धावस्था की शारीरिक अक्षमतावश इलाजरत हैं,ऐसे अवस्था में उनसे जमीन का भारी-भरकम राशि वसूलना उनको मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के समान है।

दूसरी तरफ केलो विहार कालोनी के उन हितग्राहियों को उप पंजीयक कार्यालय से तुगलकी आदेश व नोटिस जारी किया गया है जो आबंटित भूमि पर अब तक मकान निर्माण नहीं करा सके हैं उनके संतुष्टिपूर्ण जबाव न आने पर उनका आबंटन निरस्ती की कार्रवाई करने को कहा गया है यहां विचारणीय तथ्य यह है कि जब उनके भूमि का पट्टा ही नहीं मिला है तो उन्हें बैंक से लोन ही नहीं मिला ऐसे में वे मकान कैसे बनायेंगे।
भाजपा सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा तो लगाती है पर असलियत यही है कि भाजपा सरकार जनता के जेब से पैसा छीनकर विकास करना चाहती है।
रायगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शाखा यादव ने भाजपा सरकार के इस जन विरोधी रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भाजपा सरकार से मांग करते हुए कहा है कि केलो विहार कालोनी वासियों के साथ 2023 में निर्धारण दर अनुसार प्रीमियम राशि लिया जाकर न्यायसंगत स्थायी पट्टा वितरण किया जाना चाहिए अन्यथा केलो विहार सहकारी समिति के समस्त संघर्ष,आंदोलन और न्याय की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी भी सहभागी रहेगी।
















