नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी ऊपरी सीमा को आज, 23 मार्च से हटा दिया है। अब एयरलाइंस कंपनियां टिकट के दाम अपनी लागत और बाजार की स्थिति के हिसाब से तय कर सकेंगी।
पिछले साल दिसंबर में IndiGo संकट और बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के बाद सरकार ने यात्रियों को राहत देने के लिए एकतरफा यात्रा के किराए पर अधिकतम 18,000 रुपये की सीमा तय की थी। अब इस कैप को खत्म कर दिया गया है।
क्यों हटाया गया प्रतिबंध?
एयरलाइंस कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत को लेकर दबाव में थीं। Federation of Indian Airlines (FIA), जिसमें IndiGo, Air India और SpiceJet शामिल हैं, ने सरकार से किराया नियंत्रण हटाने की मांग की थी।
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में Iran–Israel conflict के चलते हवाई ईंधन (ATF) महंगा हो गया है। साथ ही पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से बचकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खपत और ऑपरेशन लागत दोनों बढ़ गए हैं।
मंत्रालय की क्या हिदायत है?
किराया सीमा हटाने के साथ ही मंत्रालय ने एयरलाइंस को सख्त निर्देश दिए हैं कि टिकट के दाम तर्कसंगत और पारदर्शी रखें। यात्रियों के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए। सरकार किरायों की लगातार निगरानी करेगी और किसी रूट पर मनमाना किराया बढ़ाने पर कार्रवाई भी हो सकती है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
अब पीक सीजन या आखिरी समय में टिकट बुक कराने पर यात्रियों को 18,000 रुपये से ज्यादा किराया देना पड़ सकता है। हालांकि सामान्य दिनों में एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा के चलते किराए संतुलित रहने की उम्मीद है।
कैसे शुरू हुआ था मामला?
दिसंबर में IndiGo की कई उड़ानें रद्द होने के बाद बाकी एयरलाइंस ने किराए काफी बढ़ा दिए थे। इसके बाद सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए किराए की अधिकतम सीमा तय की थी, जिसे अब एयरलाइंस को राहत देने के लिए हटा लिया गया ।
















