केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बांटे जाने वाले अनाज को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही है। सरकार 1 अप्रैल 2026 से पीडीएस में ब्रोकन राइस (टूटे चावल) की हिस्सेदारी 25% से घटाकर 10% करने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रख सकती है। इस बात की जानकारी खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को दी।
इस फैसले के बाद हर साल करीब 90 लाख टन अतिरिक्त ब्रोकन राइस एथेनॉल बनाने के लिए उपलब्ध हो सकेगा। माना जा रहा है कि यह कदम बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच लिया जा रहा है, ताकि देश की तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
एथेनॉल ब्लेंडिंग में भारत की बड़ी छलांग
खाद्य सचिव के अनुसार, भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की दर 2013 के 1.5% से बढ़कर अब 20% तक पहुंच गई है। इससे देश को अब तक 1.63 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। साथ ही, 2014 से अब तक 2.77 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात भी कम हुआ है।
सरकार अब एथेनॉल की हिस्सेदारी और बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसमें 20% से ज्यादा ब्लेंडिंग, डीजल में एथेनॉल मिलाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं।
एथेनॉल उद्योग को मिलेगा स्थायी सपोर्ट
सरकार का मानना है कि ब्रोकन राइस की स्थिर आपूर्ति से एथेनॉल उद्योग को मजबूती मिलेगी। साल 2023 में गन्ना और चावल की कमी के कारण डिस्टिलरीज को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ा था, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ था। अब इस नई व्यवस्था से सप्लाई चेन बेहतर बनी रहेगी।
नई व्यवस्था ऐसे करेगी काम
फिलहाल सरकार देश के करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है, जिसमें 25% तक ब्रोकन राइस शामिल होता है। प्रस्ताव लागू होने के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया जाएगा।
हर साल पीडीएस के तहत बांटे जाने वाले 360-370 लाख टन अनाज में से बचा हुआ ब्रोकन राइस नीलामी के जरिए एथेनॉल कंपनियों, पशु आहार उद्योग और अन्य क्षेत्रों को बेचा जाएगा। इस व्यवस्था का परीक्षण पांच राज्यों में पहले ही सफल रहा है।
अगले साल से फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) डिस्टिलरीज को साबुत चावल देना बंद कर देगी। इसके बजाय ब्रोकन राइस को ही मुख्य कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने डिस्टिलरीज से यह भी कहा है कि वे इस साल आवंटित चावल का स्टॉक 30 जून 2026 तक रियायती दर पर उठा लें।















