मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध का असर अब भारतीय किचन तक दिखने लगा है। एलपीजी के बाद अब खाने के तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी शुरू हो गई है। भारत में पूड़ी, पराठा और रोजमर्रा की सब्जियों में तेल का ज्यादा इस्तेमाल होता है, ऐसे में कीमत बढ़ने से आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
तेल के दाम में तेजी
पिछले एक महीने (24 फरवरी से 24 मार्च 2026) के आंकड़ों पर नजर डालें तो खाद्य तेलों की कीमतों में साफ बढ़ोतरी हुई है। सूरजमुखी तेल 175 रुपये से बढ़कर 181 रुपये प्रति किलो हो गया है। पाम ऑयल भी करीब 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। इसके अलावा सोयाबीन, मूंगफली और सरसों के तेल के दाम में भी 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक की बढ़त दर्ज की गई है।
आयात पर ज्यादा निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का करीब 56% खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है, जबकि घरेलू उत्पादन सिर्फ 44% है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर देश के बाजार पर पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार, शहरों में एक व्यक्ति सालाना औसतन 12 किलो और ग्रामीण इलाकों में करीब 11 किलो तेल का उपयोग करता है।
कीमतों में राहत के आसार कम
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे देशों से आयात जारी रहेगा, जिससे सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी। साथ ही ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स’ के तहत देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशें भी जारी हैं।
हालांकि, मिडिल ईस्ट में बने हालात और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल तेल की कीमतों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
















