वैश्विक संकेतों के असर से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार ने गिरावट के साथ शुरुआत की। सुबह 9:15 बजे बीएसई सेंसेक्स करीब 646 अंक गिरकर 74,626 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी भी करीब 194 अंक टूटकर 23,112 के स्तर पर पहुंच गया।
निफ्टी में आज आईटी शेयरों ने कुछ सहारा दिया। टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, कोल इंडिया और ओएनजीसी में बढ़त देखी गई। वहीं टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में गिरावट रही।
IT को छोड़ बाकी सभी सेक्टर दबाव में
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटो, PSU बैंक, कैपिटल गुड्स, FMCG, रियल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 1 से 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1% टूटे।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फिनसर्व सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट ने बढ़त बनाई।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का असर
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट में रहे, जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।
वहीं गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। नैस्डैक कम्पोजिट करीब 2.4% गिरकर करेक्शन जोन में पहुंच गया, जबकि डाउ जोन्स 400 से ज्यादा अंक टूट गया। S&P 500 में भी करीब 1.7% की गिरावट आई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ गया है।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
इस बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंच गया और नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया। यह करीब 94.15 प्रति डॉलर तक गिरा, जो इससे पहले बने 93.98 के स्तर से भी नीचे है।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। पिछले एक महीने में ही भारतीय मुद्रा करीब 3.5% कमजोर हो चुकी है।
















