खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। गोलबाजार के थोक व्यापारियों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में खाद्य तेल की कीमतों में 140 से 300 रुपये प्रति टिन (13-15 किलो) तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं प्लास्टिक बोतल और डिस्पोजल सामान भी महंगे हो गए हैं। डिस्पोजल के दाम प्रति बंडल 5 से 10 रुपये तक बढ़े हैं, जो पहले 15 रुपये में मिलता था, अब 20 रुपये तक पहुंच गया है।
क्यों महंगा हो रहा खाद्य तेल?
भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के रास्ते आता है। मौजूदा हालात के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है।
- समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ने से माल ढुलाई (फ्रेट) महंगी हो गई है।
- कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग का खर्च भी बढ़ गया है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के दाम बढ़ने का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।
- इसके अलावा, कुछ व्यापारियों द्वारा स्टॉक करने से भी कीमतों में तेजी आई है।
डिस्पोजल और प्लास्टिक क्यों हुए महंगे?
डिस्पोजल और प्लास्टिक बोतलें पेट्रोलियम उत्पादों से बनती हैं, इसलिए कच्चा तेल महंगा होने का असर इन पर भी पड़ा है।
- आयातित प्लास्टिक के कच्चे माल (ग्रेन्यूल) के दाम बढ़ गए हैं।
- ट्रांसपोर्ट महंगा होने से थोक कीमतें बढ़ी हैं।
- बाजार में सीमित स्टॉक के कारण भी रेट ऊपर जा रहे हैं।
लॉकडाउन की अफवाह से बढ़ी चिंता
इन सबके बीच बाजार में लॉकडाउन की अफवाहें भी फैल रही हैं, जिससे लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने लगे हैं। गोलबाजार की चाय दुकानों पर लोग भविष्य को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। कई लोगों को डर है कि अगर हालात बिगड़े तो अचानक लॉकडाउन लग सकता है, इसलिए वे पहले से ही स्टॉक करने में जुट गए हैं।
आयात पर निर्भरता बनी वजह
मार्केट एक्सपर्ट इरफान अहमद के अनुसार, भारत में खाद्य तेल की खपत ज्यादा है, लेकिन उत्पादन कम। देश में मूंगफली, सरसों और सोयाबीन की खेती होने के बावजूद मांग पूरी नहीं हो पाती। यही वजह है कि भारत को पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल बड़ी मात्रा में विदेशों से मंगाना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर भारत की रसोई पर दिखता है।
















