भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले तीन सरकारी बैंकों और एक फिनटेक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मौद्रिक जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पाइन लैब्स पर अलग-अलग राशि का जुर्माना लगाया है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये और पाइन लैब्स पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की गलती
आरबीआई के मुताबिक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ मामलों में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की सूचना मिलने के बाद 10 कार्य दिवसों के भीतर ग्राहकों के खातों में राशि वापस जमा नहीं की। इसके अलावा, ग्राहकों को 24 घंटे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा नहीं दी गई और कुछ केसीसी खातों में मैन्युअल हस्तक्षेप भी पाया गया।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर क्यों कार्रवाई ?
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया निर्धारित समय में कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्री में अपलोड नहीं कर पाया। साथ ही, कुछ ग्राहकों के एक से अधिक बेसिक सेविंग खाते खोलने के मामले भी सामने आए।
बैंक ऑफ इंडिया की लापरवाही
बैंक ऑफ इंडिया पर प्राथमिकता वाले ऋण खातों में अतिरिक्त शुल्क वसूलने और कुछ सावधि जमा (टीडीआर) पर समय पर ब्याज का भुगतान नहीं करने के कारण जुर्माना लगाया गया है।
पाइन लैब्स की गलती
आरबीआई ने पाया कि पाइन लैब्स ने कुछ मामलों में केवाईसी प्रक्रिया पूरी किए बिना ही प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट जारी किए, जो नियमों का उल्लंघन है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय कमियों के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य बैंकों और संस्थानों को नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रेरित करना है।
















