1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए वेज नियमों का असर देशभर के प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर पर साफ दिखेगा। नए नियम के मुताबिक, अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होना जरूरी होगा। इस बदलाव से जहां पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे रिटायरमेंट फायदे बढ़ेंगे, वहीं हाथ में मिलने वाली सैलरी यानी इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नए वेज कोड से शुरुआत में कर्मचारियों की कैश इनकम कम दिखेगी, लेकिन लंबे समय में पीएफ, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा। यानी यह फैसला तुरंत फायदा देने के बजाय भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। 1 अप्रैल के बाद कर्मचारियों की पे-स्लिप में बेसिक, HRA, PF और अन्य अलाउंस का पूरा गणित बदला हुआ नजर आएगा।
ESIC पर भी पड़ेगा असर
इस बदलाव का असर ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा) पर भी देखने को मिलेगा। फिलहाल 21,000 रुपये तक की सैलरी वाले कर्मचारियों को ESIC का लाभ मिलता है, लेकिन नए वेतन ढांचे में वेज की परिभाषा बदलने से 40,000 से 60,000 रुपये कमाने वाले कई कर्मचारी इस दायरे से बाहर हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें सस्ती मेडिकल और बीमा सुविधा नहीं मिलेगी और निजी बीमा पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे खर्च बढ़ सकता है।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की कुल CTC 15,000 रुपये है और उसमें 35% बेसिक सैलरी है, तो वह अभी ESIC के दायरे में आता है। लेकिन नए नियम के तहत बेसिक 50% करना जरूरी होगा, जिससे वेज का गणित बदल जाएगा और वह 21,000 रुपये की सीमा से बाहर जा सकता है। ऐसे में वह ESIC स्कीम का लाभ खो सकता है।
इन हैंड सैलरी का गणित
विवरण- 31 मार्च तक (पुराना) – 1 अप्रैल से (अनुमानित नया)
कुल सैलरी (सीटीसी) – 60000 – 60000
बेसिक सैलरी – 20000 (33त्न)- 30000 (50त्न)
पीएफ कटौती (12%)- 2400- 3600
इन-हैंड सैलरी- 57600 (बिना टैक्स के)- 56400
भविष्य की बचत- कम- ज्यादा (पीएफ ग्रेच्युटी)
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नए वेज कोड का असर मिला-जुला रहेगा। बेसिक सैलरी बढऩे से पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि ज्यादा कटेगी, जिससे रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिलेगा, लेकिन हर महीने हाथ में मिलने वाली नकद सैलरी कम हो जाएगी। यानी अभी थोड़ा नुकसान, लेकिन भविष्य के लिए यह एक तरह की सामाजिक सुरक्षा मानी जा रही है।
- सीए योगेश पुरोहित, पूर्व सचिव आईसीएआई, रायपुर
















