1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ देशभर में कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। टैक्स सिस्टम से लेकर टोल, ईंधन, गैस और राज्यों के नियमों तक कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
गैस सिलेंडर महंगा, बढ़ेगा खर्च
कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इससे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की लागत बढ़ेगी। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा, क्योंकि खाने-पीने की चीजें और कैटरिंग सेवाएं महंगी हो सकती हैं। रायपुर में कॉमर्शियल गैस की कीमत करीब 2300 रुपये तक पहुंच गई है।
टोल पर कैश खत्म, डिजिटल पेमेंट जरूरी
अब देशभर के टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यात्रियों को टोल चुकाने के लिए FASTag या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना होगा। साथ ही टोल दरों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हाईवे पर सफर महंगा हो गया है।
रेलवे के नियम सख्त
ट्रेन यात्रियों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब टिकट कैंसिल करने के लिए कम से कम 8 घंटे पहले आवेदन करना होगा, तभी रिफंड मिलेगा। हालांकि, यात्रियों को ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा दी गई है।
टैक्स सिस्टम में बदलाव
नए वित्तीय वर्ष से इनकम टैक्स सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। पुराने कानून की जगह नया सिस्टम लागू हुआ है, जिससे प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है। गैर-ऑडिट करदाताओं के लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त कर दी गई है।
छत्तीसगढ़ में भी बदले नियम
राज्य स्तर पर भी बदलाव लागू हुए हैं। स्टाम्प ड्यूटी पर 12% सरचार्ज हटने से प्रॉपर्टी रजिस्ट्री सस्ती हुई है। वहीं शराब और बियर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल के दाम में भी करीब 1 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
खर्च बढ़ेगा, कुछ राहत भी
इन बदलावों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। जहां टैक्स और रजिस्ट्री में राहत मिली है, वहीं टोल, पेट्रोल और गैस महंगे होने से आम लोगों का खर्च बढ़ सकता है।
हर साल 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर ऐसे बदलाव किए जाते हैं, ताकि सिस्टम को बेहतर बनाया जा सके और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से नियम अपडेट किए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों का फायदा लंबे समय में मिलेगा, लेकिन फिलहाल लोगों को अपने बजट में बदलाव करना पड़ सकता है।















