दूरसंचार विभाग (DoT) ने सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स को बड़ी राहत दी है। अब WhatsApp, Telegram, Signal, Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स सिम बाइंडिंग लागू करने की नई डेडलाइन दिसंबर 2026 तक बढ़ा सकते हैं। पहले इसे 28 फरवरी, बाद में 31 मार्च तक लागू करने का समय दिया गया था।
सिम बाइंडिंग क्या है?
सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा व्यवस्था है, जिसके तहत ऐप्स केवल उसी डिवाइस में काम करेंगे जिसमें सिम कार्ड लगेगा। इसका मतलब है कि कोई यूजर अपने नंबर का सिम दूसरे फोन में लगाकर वॉट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम कदम बताया था।
साइबर फ्रॉड रोकने में मदद
DoT का मानना है कि सिम बाइंडिंग से साइबर फ्रॉड को रोकने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए, कई लोग अपने वॉट्सऐप नंबर का सिम किसी और डिवाइस में इस्तेमाल कर रहे हैं। सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा। यह नियम सिर्फ वॉट्सऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी इंस्टेंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू होगा। इसे बैंकिंग ऐप्स और UPI ऐप्स की तरह सुरक्षित बनाया जाएगा।
लागू करने में देरी क्यों?
सिम बाइंडिंग का नोटिफिकेशन नवंबर 2025 में जारी हुआ था और प्लेटफॉर्म्स को इसे 90 दिनों में लागू करने का निर्देश मिला था। हालांकि, तकनीकी जटिलताओं के कारण इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका। Meta, Telegram और अन्य कंपनियों का कहना है कि इसके लिए ऐप्स के सॉफ्टवेयर और Android/iOS ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव की जरूरत है, साथ ही R&D और टेस्टिंग में समय लग सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सभी प्लेटफॉर्म्स अभी DoT के साथ मिलकर टेस्टिंग और बीटा रोलआउट कर रहे हैं।
















