मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ नजर आने लगा है। कई बड़े एयरपोर्ट या तो बंद हैं या सीमित क्षमता पर काम कर रहे हैं, जिससे भारतीय एयरलाइंस के विस्तार पर असर पड़ा है। ऐसे हालात में भारत अब साउथ-ईस्ट एशिया की ओर ध्यान बढ़ा रहा है, जहां उड़ानों की संख्या बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार जल्द ही थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ फ्लाइट्स बढ़ाने को लेकर बातचीत शुरू करेगी। मार्च में हुई एक इंटर-मिनिस्टेरियल बैठक में इस दिशा में फैसला लिया गया था। अब नागरिक उड्डयन विभाग इन देशों के साथ मिलकर नई उड़ानों और सीट क्षमता बढ़ाने पर काम करेगा।
मिडिल ईस्ट संकट से एयरलाइंस प्रभावित
मिडिल ईस्ट भारतीय एयरलाइंस के लिए एक बड़ा बाजार है। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों की करीब 40% अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसी क्षेत्र में संचालित होती हैं। लेकिन मौजूदा हालात के चलते एयरलाइंस इस गर्मी में अपने विमानों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रही हैं, जिससे नए विकल्प तलाशना जरूरी हो गया है।
साउथ-ईस्ट एशिया बना नया फोकस
पिछले कुछ वर्षों में साउथ-ईस्ट एशिया भारतीय पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है। आसान वीजा प्रक्रिया, कम खर्च और कम समय में यात्रा की सुविधा इसे और आकर्षक बनाती है। यही वजह है कि इन देशों के लिए उड़ानों की मांग तेजी से बढ़ रही है और मौजूदा सीटें लगभग फुल चल रही हैं।
पहले भी बढ़ाई गई है फ्लाइट्स
भारत पहले ही कई देशों के साथ उड़ानों की संख्या बढ़ा चुका है। इंडोनेशिया के साथ हर हफ्ते 9,000 सीट, वियतनाम के लिए 42 फ्लाइट्स प्रति सप्ताह और थाईलैंड के लिए करीब 43% तक सीट क्षमता बढ़ाई गई है। अब बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें और इजाफा करने की तैयारी है।
यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
- टिकट की कीमतें नियंत्रण में रह सकती हैं
- यात्रियों को ज्यादा फ्लाइट ऑप्शन मिलेंगे
- पीक सीजन में भी टिकट आसानी से उपलब्ध हो सकेगा
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात के बीच भारत का साउथ-ईस्ट एशिया की ओर रुख करना यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
















