ईओडब्ल्यू ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) घोटाले के मामले में 660 करोड़ रुपये की राशि के साथ 3500 पन्नों का पूरक चालान विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया है। इस मामले में रेकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर के संचालक राकेश जैन, रेकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स के लाइजनर (मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा के जीजा) ङ्क्षप्रस जैन और डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को आरोपी बनाया गया है।
‘हमर लैब’ योजना में गड़बड़ी
जानकारी के मुताबिक, ‘‘हमर लैब’’ योजना के तहत जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों में नि:शुल्क डायग्नोस्टिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खरीदी की गई थी। मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा पुल टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत निविदा प्राप्त की गई थी।
निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से तीन फर्मों के बीच कार्टेलाइजेशन किया गया था, जिससे इन फर्मों के टेंडर में समान पैटर्न पर विवरण भरा गया।
एमआरपी से ज्यादा दाम पर खरीदारी
टेंडर में जो उत्पाद स्पष्ट रूप से अंकित नहीं थे, उन्हें भी समान रूप से तीनों फर्मों ने दर्शाया और उनके दाम भी समान थे। इनमें से मोक्षित, आएमएस और शारदा इंडस्ट्रीज ने सबसे कम दर कोट की थी। मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस कंपनी ने एमआरपी तय किया था, लेकिन आरोपी कुंजल शर्मा और शशांक चोपड़ा ने षडयंत्रपूर्वक रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स को तय एमआरपी से अधिक दामों पर सीजीएमएसी को भेजा। नतीजतन, सीजीएमएसी को मोक्षित कॉर्पोरेशन को तीन गुना अधिक भुगतान करना पड़ा।
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
इस घोटाले में शशांक चोपड़ा के जीजा ङ्क्षप्रस कोचर ने रेकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए लाइजनिंग का काम किया था। तीनों कंपनियों ने अपनी अर्हता सुनिश्चित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जिनका इस्तेमाल निविदा प्रक्रिया में किया गया।
अब तक इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है, और ‘हमर लैब’ योजना में सरकारी राशि के दुरुपयोग को लेकर जांच जारी है।
















