रायगढ़, 12 मई 2026। रायगढ़ जिले में हाल के दिनों में पंचधारी एनीकट सहित विभिन्न नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में डूबने से हुई जनहानि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक जनहित में विस्तृत सुरक्षा एडवायजरी जारी की है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी द्वारा जारी इस सार्वजनिक सूचना में नागरिकों से जलस्रोतों के आसपास अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन सर्वोपरि है तथा एक भी जनहानि पूरे समाज और प्रशासन के लिए अपूरणीय क्षति है
जारी एडवायजरी में कहा गया है कि पंचधारी एनीकट, नदी, तालाब, पोखर एवं अन्य जलाशयों में स्नान, पिकनिक अथवा भ्रमण के दौरान असावधानी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। ऐसे में नागरिकों, अभिभावकों, युवाओं, शिक्षण संस्थानों तथा ग्राम पंचायतों की सामूहिक जिम्मेदारी तय करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को बिना निगरानी किसी भी जलस्रोत के समीप न जाने दें। पारिवारिक पिकनिक अथवा भ्रमण के दौरान बच्चों पर निरंतर नजर रखना आवश्यक बताया गया है, ताकि किसी भी आकस्मिक दुर्घटना से बचा जा सके। एडवायजरी में युवाओं और आमजन को जलाशयों के आसपास जोखिमपूर्ण गतिविधियों से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि एनीकट के मुहाने, गहरे पानी वाले क्षेत्रों, तेज बहाव, काई लगी फिसलनयुक्त चट्टानों अथवा खतरनाक घाटों के पास सेल्फी लेना, स्टंट करना या वीडियोग्राफी करना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे स्थानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। जिन लोगों को तैरना नहीं आता है, उन्हें जलाशयों में प्रवेश नहीं करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने चेताया है कि पानी की सतह सामान्य दिखने के बावजूद भीतर गहराई और तेज बहाव हो सकता है। वहीं मिर्गी, हृदय रोग अथवा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को जलस्रोतों में स्नान से परहेज करने को कहा गया है।
प्रशासन ने मादक पदार्थों के सेवन के बाद जलाशयों में प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित और अत्यंत खतरनाक बताया है। एडवायजरी में कहा गया है कि शराब या किसी भी नशे की स्थिति में जलस्रोतों में जाना प्राणघातक हो सकता है। मौसम और जलस्तर को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून अथवा बांधों और एनीकट से अचानक पानी छोड़े जाने की स्थिति में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे समय जल संसाधन विभाग द्वारा सायरन अथवा चेतावनी जारी होने पर तत्काल जलाशयों और किनारों को खाली करने की सलाह दी गई है। भारी बारिश एवं आंधी-तूफान के दौरान भी जलाशयों के पास नहीं जाने की अपील की गई है।
नौकायन संबंधी सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। जर्जर अथवा असुरक्षित नावों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी नहीं बैठाने, प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने तथा नौकायन के दौरान संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। शिक्षण संस्थानों और ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी भी तय करते हुए प्रशासन ने सभी स्कूल एवं कॉलेज प्रबंधन को छात्रों के बीच जल सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बिना प्रशासनिक अनुमति एवं पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के किसी भी जलाशय के समीप स्कूल या कॉलेज पिकनिक आयोजित नहीं करने को कहा गया है। वहीं ग्राम पंचायतों को खतरनाक घाटों और एनीकट के पास लाल रंग के चेतावनी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय तैराकों एवं आपदा मित्रों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एडवायजरी में आपातकालीन स्थिति में मानवीय सहयोग और जीवन रक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी शामिल किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति जल में फंस जाए तो तत्काल पुलिस सहायता डायल-112 और एम्बुलेंस सेवा डायल-108 को सूचना देने की अपील की गई है। प्रशासन ने बिना प्रशिक्षण सीधे पानी में छलांग लगाने से बचने तथा रस्सी, लकड़ी, कपड़ा या तैरने वाली वस्तुओं के माध्यम से सहायता पहुंचाने की सलाह दी है। साथ ही यदि कोई व्यक्ति स्वयं जल में फंस जाए तो घबराने के बजाय मानसिक संतुलन बनाए रखने, शरीर से भारी वस्तुएं हटाने तथा सहायता के लिए संकेत देने की बात कही गई है।
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी ने जिलेवासियों से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि वे इस एडवायजरी को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन परिवार और समाज के लिए अमूल्य है। प्रशासन के साथ मिलकर सभी लोग स्वयं सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखने में सहयोग करें।
















