कर्नाटक की सियासत में आज एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई। कांग्रेस के कद्दावर नेता और दक्षिण भारत में पार्टी के ‘संकटमोचक’ माने जाने वाले डीके शिवकुमार ने आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। बेंगलुरु स्थित लोक भवन के भव्य ग्लास हाउस में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शिवकुमार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस ऐतिहासिक पल के साथ ही आठ बार के विधायक डीके शिवकुमार का वह सपना आखिरकार साकार हो गया, जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक जमीनी और राजनीतिक संघर्ष किया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कई अन्य नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
शपथ लेने वाले मंत्रियों की लिस्ट-
डी.के. शिवकुमार (मुख्यमंत्री)
कर्नाटक के 18वें मुख्यमंत्री बने।
वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं।
सिद्धारमैया सरकार में डिप्टी CM रहे।
2020 से कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।
1989 से अब तक कोई चुनाव नहीं हारे।
1989 से 2008 तक सातनूर से MLA रहे।
2008 से लगातार कनकपुर सीट से विधायक।
कांग्रेस पार्टी में ‘संकटमोचक’ माने जाते हैं।
जी. परमेश्वर (उपमुख्यमंत्री)
कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली दलित नेता।
सिद्धारमैया कैबिनेट में गृह मंत्री रहे।
मधुगिरी और कोरटगेरे सीट से कई बार MLA रहे।
2018 में कर्नाटक के पहले दलित डिप्टी CM बने।
2015 में कर्नाटक के गृह मंत्री बने।
2010 से 2018 तक कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
के.एच. मुनियप्पा
कर्नाटक के सीनियर दलित लीडर की पहचान।
सिद्धारमैया सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे।
1991 से 2019 तक 7 बार सांसद चुने गए।
कांग्रेस की केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री, समाजिक न्याय मंत्री रहे।
के.जे. जॉर्ज
कर्नाटक कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल।
सिद्दारमैया सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे।
कर्नाटक के गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री रहे।
बेंगलुरु के सर्वगन्या सीट से 1985 में पहली बार MLA बने।
2023 से राज्य के ऊर्जा मंत्री रहे हैं।
एम.बी. पाटिल
कांग्रेस का बड़ा लिंगायत चेहरा।
सिद्धारमैया सरकार में भारी उद्योग मंत्री रहे।
2013 से 2018 तक जल संसाधन और उद्योग मंत्री रहे।
बाबलेश्वर सीट से 2008 में पहली बार MLA बने।
बाबलेश्वर सीट से लगातार चार बार विधायक बने।
लिंगायत को अलग धर्म बनाने की मांग से चर्चा में रहे।
रामलिंगा रेड्डी
बीटीएम लेआउट सीट से विधायक हैं।
2008 से बीटीएम लेआउट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
बेंगलुरु शहर के बड़े कांग्रेस नेताओं में शामिल।
कर्नाटक के गृहमंत्री और परिवहन मंत्री रह चुके हैं।
हिंदू धर्मदान विभाग का मंत्रालय संभाल चुके हैं।
वे पहली बार 1989 में जयनगर से विधायक चुने गए थे।
1994, 1999 और 2004 में भी उन्होंने यही सीट जीती।
सतीश जारकीहोली
सिद्धारमैया के बाद अहिंदा पॉलिटिक्स का दूसरा सबसे बड़ा चेहरा।
2008 से बेलगावी जिले के यमकनमर्डी विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीतते आ रहे हैं।
बेलगावी जिले के सबसे प्रभावशाली दलित नेता
कर्नाटक कांग्रेस कमिटी के वर्किंग प्रेसिडेंट रहे।
कृष्णा बायरे गौड़ा
सिद्धारमैया सरकार में रेवेन्यू मिनिस्टर रहे।
2013 से 2018 तक कर्नाटक के कृषि मंत्री रहे।
2008 से लगातार सभी विधानसभा चुनाव जीते।
अच्छे परफॉर्मर और बेदाग छवि वाले नेता की पहचान।
प्रियांक खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे।
कर्नाटक कांग्रेस में बड़ा युवा दलित चेहरा।
कलबुर्गी जिले के चित्तापुर से 3 बार के MLA।
पर्यटन, आईटी, ग्रामीण विकास, पंचायती राज मंत्री रहे।
यू.टी. खादर
कर्नाटक कांग्रेस के बड़े मुस्लिम लीडर।
सिद्धारमैया सरकार में विधानसभा के स्पीकर रहे।
2007 में पहली बार मंगलुरु से उपचुनाव जीतकर विधायक बने।
2008, 2013, 2018 और 2023 में लगातार विधानसभा चुनाव जीता।
2013 से 2018 के बीच चिकित्सा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे।
2023 में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर बनाए गए।
ईश्वर खंड्रे
हैदराबाद कर्नाटक रीजन के प्रभावशाली लिंगायत नेता।
अखिल भारतीय वीर शैव लिंगायत महासभा के अध्यक्ष भी हैं।
2008 से बीदर जिले के भालकी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे।
कर्नाटक के ग्रामीण विकास, वन, पंचायती राज मंत्री रहे।
यतींद्र सिद्धरमैया
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे हैं।
पेशे से डॉक्टर और पैथोलॉजी विशेषज्ञ हैं।
कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य हैं।
वरुणा विधानसभा से पूर्व विधायक रहे।
बिरथी सुरेश
सिद्धारमैया के सबसे करीबी नेता।
कुरुबा समुदाय के बड़े लीडर की पहचान।
2013 में पहली बार केआर पुरम से विधायक बने।
2018 और 2023 में हेब्बाल सीट से MLA बने।
कर्नाटक के नगर विकास और राजस्व मंत्री रहे।
शरण प्रकाश पाटि
सिद्धारमैया सरकार में चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास मंत्री थे।
2004, 2008 और 2013 में लगातार तीन बार सेडम सीट से विधायक।
2018 में उन्हें यहां से हार का सामना करना पड़ा।
बड़े लिंगायत नेता के तौर पर पहचान।
2004 में पहली बार MLA बने।
सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में 2013 में पहली बार कर्नाटक के मंत्री बने।















