बिना टिकट यात्रा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारतीय रेलवे बड़ा कदम उठाया है। वैध टिकट या पास के बिना यात्रा करने वाले यात्रियों पर लगने वाले न्यूनतम जुर्माने को मौजूदा 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है। वहीं पुरुष यदि महिला कोच पर सफर करता है तो 2500 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। वहीं यदि कोई ट्रेन और स्टेशन पर बिना किसी इजाजत के सामान की बिक्री करता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर 2000 रुपये का जुर्माना लगेगा। ये नियम 20 जून से लागू हो गए हैं।
रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत, पुरुष यात्रियों का महिला डिब्बों या कोचों में प्रवेश करना और महिला यात्रियों के लिए आरक्षित स्थान पर कब्जा करना दंडनीय अपराध है। ऐसे उल्लंघन के लिए जुर्माना और कारावास दोनों हो सकते हैं।
दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए, पुरुष यात्रियों को महिला डिब्बों या महिला विशेष ट्रेनों में यात्रा नहीं करनी चाहिए। पुरुष यात्रियों के लिए पर्याप्त जगह वाले वैकल्पिक डिब्बे या ट्रेनें उपलब्ध हैं।
हालांकि, पुरुष यात्रियों को महिलाओं के डिब्बों में यात्रा करने से रोकने के लिए, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश के खिलाफ नियमित रूप से विशेष अभियान चलाता है।
अब, जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के तहत, रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत अपराधों के लिए जुर्माना 20 जून, 2026 से 500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है।
रेल मंत्रालय ने 19 जून को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा, “जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 (2026 का 8) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि को उस तिथि के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान, जहां तक यह क्रमांक 52 से संबंधित है…
















