छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने शासकीय सेवकों की मृत्यु के बाद लंबित अनुशासनात्मक प्रकरणों के निपटारे को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित है और इस दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे मामलों का निराकरण निर्धारित प्रक्रिया और सेवा नियमों के अनुसार किया जाएगा।

मंत्रालय से जारी हुए नए दिशा-निर्देश
जीएडी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके विरुद्ध लंबित अनुशासनात्मक मामलों को बिना स्पष्ट नियमों के अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक मामले का परीक्षण सेवा नियमों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
आश्रितों को मिलेगी राहत
सरकार का मानना है कि कई मामलों में कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी विभागीय जांच वर्षों तक लंबित रहने से परिवार को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिलने में देरी होती है। नए निर्देशों से ऐसी स्थिति में अनावश्यक विलंब कम होगा और आश्रितों को समय पर उनके वैधानिक अधिकार मिल सकेंगे।
विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों और सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई करें। जिन मामलों में विभागीय जांच समाप्त की जानी है, वहां नियमानुसार आदेश जारी किए जाएं और आवश्यक अभिलेखों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
प्रशासनिक प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी
विशेषज्ञों के अनुसार, नए निर्देशों से विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी होगी। इससे वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा आसान होगा और विभागों में अनावश्यक कानूनी विवाद भी कम होंगे।
सभी विभागों को भेजे गए आदेश
जीएडी ने जारी निर्देशों की प्रति सभी शासकीय विभागों, विभागाध्यक्षों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दी है। अब विभागों को अपने यहां लंबित ऐसे मामलों की समीक्षा कर नए निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे विभागीय प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनेंगी तथा मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को समय पर न्याय और वैधानिक लाभ मिलने का रास्ता आसान होगा।
















