सावन का पवित्र महीना अपने आखिरी पड़ाव पर है. इसलिए लोगों का सवाल यह है कि सावन पूर्णिमा कब मनाया जाएगा, यह 28 अगस्त को है या 29 अगस्त को? यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि भगवान शिव की विदाई, रक्षाबंधन का त्योहार और पुण्य-स्नान का अमृत मुहूर्त – सब कुछ इसी एक दिन समाया है. पंचांगों में अलग-अलग जानकारी ने लोगों को उलझन में डाल दिया है. किस दिन स्नान-दान करने से पुण्य मिलेगा? किस दिन राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा? आइए, वैदिक पंचांग की सटीक गणना के आधार पर इस पावन तिथि से जुड़ी हर बात को विस्तार से जानते हैं.
सावन पूर्णिमा सही तिथि क्या है?
वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) की मान्यता के कारण 28 अगस्त को ही सावन पूर्णिमा का व्रत और पूजन किया जाएगा. यानी, इस साल सावन पूर्णिमा शुक्रवार, 28 अगस्त को होगी. जो लोग चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, वे 27 अगस्त की रात को यह अनुष्ठान करेंगे, क्योंकि उस रात पूर्ण चंद्रमा दिखाई देगा.यह भी पढ़े
सावन पूर्णिमा स्नान-दान का समय
सावन पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है. स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:28 बजे से 5:12 बजे तक – सबसे उत्तम रहेगा. दान का शुभ समय 28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:57 बजे से लेकर पूर्णिमा तिथि समाप्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगा. इसी दिन रक्षाबंधन भी मनाया जाएगा. राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे के बीच रहेगा. ध्यान रखें, इसके बाद भाद्रपद यानी भादो महीने की शुरुआत हो जाएगी.
सावन पूर्णिमा धार्मिक महत्व
सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन है. यह सावन महीने का आखिरी दिन है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन की तंगी दूर होती है. ब्रह्म मुहूर्त में गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान और अन्न या वस्त्र का दान करने से जन्मों के पाप मिट जाते हैं और अपार पुण्य की प्राप्ति होती है.
















