छत्तीसगढ़ के सरकारी राशन दुकानों में चावल आवंटन में गड़बड़ी के बाद शक्कर वितरण के मामले में अनियमितता पाई गई है। मीडिया में मामला उछलने के बाद खाद्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में 166 उचित मूल्य दुकानों को निलंबित और 153 दुकानों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है।
इसके अलावा 22 राशन दुकानदारों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। साथ हीं जिन दुकानदारों ने शक्कर की कालाबाजारी की उनसे वसूली हो रही है। अबतक सरकारी राशन दुकानों से 87 प्रतिशत वसूली का कार्य पूरा कर लिया है।
कैसे हुआ ये पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 से 2023 के दौरान उचित मूल्य दुकान (Fair Price Shop) से 115 करोड़ रूपये मूल्य के 41210 क्विंटल शक्कर गायब हो गया। लेकिन खाद्य विभाग का कहना है कि इस संबंध में विभाग को किसी भी तरह की शिकायत ही नहीं मिली।
साल 2021 से 2023 के बीच हुई अनियमितता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2023 के बीच हुई अनियमितता की जांच सितंबर 2022 में की गई थी। तब राशन दुकानों के बचत स्टॉक का सत्यापन करने के बाद राशन दुकानों में 15280 क्विंटल शक्कर की कमी पाई गई थी, जिसका अनुमानित रकम 5.49 करोड़ होता है।
अब इस संबंध में संबंधित राशन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। खाद्य विभाग का कहना है, सभी दोषी दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की रोकथाम के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता और हमर संगवारी संस्था के अध्यक्ष राकेश चौबे ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि खाद्य संचालनालय के अफसरों की लापरवाही के कारण राशन दुकानदारों के पास पहले से स्टॉक मौजूद होने के बावजूद लगातार आवंटन किया जाता रहा।
विधानसभा में बनी विधायकों की जांच समिति के सामने अफसरों ने खुद माना है कि राशन दुकानों से 115 करोड़ रुपये से अधिक की शक्कर चोरी हुई है। सवाल यह भी है कि अगर वाकई शक्कर घोटाला नहीं हुआ, तो फिर दुकानदारों को नोटिस क्यों जारी किए गए















