छत्तीसगढ़ के चौकी सुकुलदेहन क्षेत्र में दर्ज मतांतरण से जुड़े मामले की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में सामने आया है कि संबंधित संगठन के कुछ पदाधिकारियों को पहचान छिपाने के लिए “पाल” नाम का कोडनेम दिया गया था। जमीनी स्तर पर काम कर रहे इन लोगों को ट्रैवल वाउचर्स के जरिए भुगतान किया जाता था, जिससे यह मामला सामान्य धार्मिक गतिविधियों से अधिक संगठित और योजनाबद्ध प्रतीत होता है।
आठ जनवरी को ग्राम धर्मापुर में मिशनरी डेविड चाको के खिलाफ आश्रम/चर्च संचालन, नाबालिग बच्चों को रखने और कथित मतांतरण गतिविधियों को लेकर मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी के अधीन काम करने वाले कुछ खास संचालकों को संगठन के भीतर “पाल” कोडनेम से जाना जाता था।
ट्रैवल वाउचर्स से होता था भुगतान
इन लोगों को यात्रा और अन्य कामों के लिए ट्रैवल वाउचर्स दिए जाते थे। पुलिस यह जांच कर रही है कि इन वाउचर्स का भुगतान ऑनलाइन क्लेम के जरिए होता था या नकद, साथ ही इसमें इस्तेमाल की गई राशि का स्रोत क्या था।
कई किताबें भी जब्त
पुलिस के मुताबिक, इंडिया पेंटाकोस्टल चर्च (आईपीसी) से जुड़े जोनल कमांडर, जोनल लीडर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध प्रशिक्षण से जुड़ी किताबें भी जब्त की गई हैं। इन पुस्तकों में इस्तेमाल की गई भाषा, उसके अर्थ और प्रचार के उद्देश्य को लेकर भी आरोपी से सवाल किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, आरोपी से अमेरिका में अध्यापन के बाद भारत लौटने पर मिली कथित धनराशि को लेकर भी पूछताछ जारी है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि यह पैसा किस माध्यम से भारत लाया गया, किस खाते से किस खाते में ट्रांसफर हुआ और विदेशी मुद्रा को किस प्रक्रिया से बदला गया।
















