हिंदू धार्मिक स्थलों और उनके आसपास के क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हरिद्वार की डामकोठी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अर्धकुंभ करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं से जुड़ा बड़ा धार्मिक आयोजन है, ऐसे में तीर्थ स्थलों की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप बनाए रखने के लिए नीतिगत स्तर पर ठोस फैसलों की जरूरत है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि समिति के स्तर पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के अधिसूचित क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध से जुड़ा प्रस्ताव लाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ क्षेत्र में यह प्रस्ताव पूरी घाटी तक लागू हो सकता है, जहां से यात्रा शुरू होती है। वहीं बदरीनाथ धाम में भी अधिसूचित सीमा के विस्तार को लेकर चर्चा की जा रही है। इस संबंध में समिति सरकार को अपनी मंशा से अवगत कराएगी।
उन्होंने हरिद्वार में गंगा के प्रमुख घाटों और धार्मिक क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थानों को चिह्नित कर वहां प्रवेश व्यवस्था पर प्रशासनिक स्तर पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। जहां धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां विशेष प्रावधान जरूरी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अर्धकुंभ से पहले इस विषय पर शासन स्तर से कोई निर्णय सामने आ सकता है, क्योंकि सरकार इस पर विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बीते वर्षों में हुई कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए हेमंत द्विवेदी ने अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई सख्ती का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को बनाए रखने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं। चारधाम सहित प्राचीन देवालयों और पवित्र नदियों की भूमि होने के कारण राज्य की धार्मिक विरासत को विशेष संरक्षण देने की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया।
















