उत्तराखंड के हरिद्वार में 2027 में आयोजित होने वाले अर्ध कुंभ मेले की तिथियां घोषित कर दी गई है। (Haridwar Ardh Kumbh 2027 Date Announced) 97 दिनों तक चलने वाले इस विराट मेले में कुल 10 प्रमुख स्नान उत्सव होंगे। इनमें तीन ‘अमृत’ (शाही) स्नान शामिल हैं। मेला प्रशासन ने मंगलवार को यह घोषणा की।
पहला स्नान उत्सव 14 जनवरी को
अर्द्ध कुंभ स्नान की तिथियों की घोषणा करते हुए, मेला अधिकारी सोनिका सिंह ने बताया कि चार महीने तक चलने वाले इस मेले (जनवरी से अप्रैल 2027 तक) के दौरान पहला स्नान उत्सव 14 जनवरी (मकर संक्रांति) को, दूसरा 6 फरवरी (मौनी अमावस्या) को, तीसरा 11 फरवरी (बसंत पंचमी) को, चौथा 20 फरवरी (माघ पूर्णिमा) को और पांचवां 6 मार्च (महाशिवरात्रि) को होगा।
सिंह ने आगे बताया कि अर्द्ध कुंभ का छठा स्नान उत्सव 8 मार्च (फाल्गुन अमावस्या) को होगा; सातवां 7 अप्रैल (नव संवत्सर) को; आठवां 14 अप्रैल (मेश संक्रांति) को; नौवां 15 अप्रैल को; और अंतिम स्नान उत्सव 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) को होगा। (Haridwar Ardh Kumbh 2027 Date Announced) उन्होंने आगे बताया कि इन तिथियों में से 6 मार्च (महाशिवरात्रि), 8 मार्च (फाल्गुन अमावस्या) और 14 अप्रैल (मेश संक्रांति) को निर्धारित स्नानों को ‘अमृत स्नान’ (पवित्र स्नान) के रूप में नामित किया जाएगा।
क्या है अर्धकुम्भ?
बता दें कि, अर्ध कुंभ मेला हर छह साल में हरिद्वार और प्रयागराज में आयोजित होता है , जो दो पूर्ण कुंभ मेलों के ठीक बीच में पड़ता है। अर्ध शब्द का अर्थ आधा होता है , लेकिन आध्यात्मिक रूप से इसका महत्व पूर्ण कुंभ मेले के समान ही है।
कैसे तय होती है तिथियां?
गौरतलब है कि, इनकी गणनाएँ हजारों वर्षों से संरक्षित सटीक सनातन खगोलीय सिद्धांतों का उपयोग करके की जाती हैं। ये गणनाएँ खगोलीय पिंडों, विशेष रूप से बृहस्पति और सूर्य की, विशिष्ट राशि चक्र स्थितियों के संबंध में गति पर आधारित हैं। (Haridwar Ardh Kumbh 2027 Date Announced) कहा जाता है कि, जब ये परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तब अर्ध कुंभ होता है। इस प्रक्रिया में मानवीय पसंद की कोई भूमिका नहीं है।
















