Nepal Earthquake हिमालय की गोद में बसे इलाकों पर इस वक्त प्रकृति कहर बनकर टूट पड़ी है. एक तरफ नेपाल पहले से ही भयानक जल प्रलय की त्रासदी झेल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ तिब्बत और नेपाल की सीमा पर महज एक घंटे के भीतर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. पानी के प्रकोप और फिर धरती के कांपने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. जल प्रलय के बीच आए इन झटकों ने लोगों की सांसें थाम दी हैं. लोगों को डर लग रहा है कि रात के अंधेरे में फिर से कोई प्रलय ना आ जाए.
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप का पहला झटका तिब्बत के इलाके में महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई. इसके ठीक एक घंटे बाद नेपाल में भी धरती डोली और वहां 3.2 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. एक तरफ बाढ़ का पानी और दूसरी तरफ कांपती धरती ने भू-वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है.
तिब्बत और नेपाल में एक घंटे के भीतर दो झटके
जानकारी के अनुसार, पहला झटका तिब्बत क्षेत्र में रात करीब 8 बजकर 15 मिनट पर महसूस किया गया. 4.9 की तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई में था. कम गहराई होने की वजह से झटकों का अहसास काफी तेज था. जैसे ही घरों का सामान हिलने लगा, लोग खौफ के मारे खुले मैदानों की तरफ भागे.
अभी लोग संभल भी नहीं पाए थे कि ठीक एक घंटे बाद, रात 9 बजकर 18 मिनट पर नेपाल में भी भूकंप का झटका आया. 3.2 की तीव्रता वाले इस दूसरे झटके का केंद्र भी जमीन से 10 किलोमीटर नीचे ही था. भले ही यह झटका हल्का था, लेकिन पहले से ही बाढ़ का दंश झेल रहे नेपाल के लोगों के लिए ये किसी भयावह सपने से कम नहीं था.
नेपाल में जल प्रलय: ग्लेशियर फटने से मचा तांडव
भूकंप के इन झटकों से ठीक पहले नेपाल में चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के कारण विनाशकारी बाढ़ आ चुकी है. भोटे कोशी और त्रिशूली नदियां उफान पर हैं और इस जल प्रलय ने रसुवा, नुवाकोट व धाडिंग जैसे जिलों में भयानक तबाही मचाई है.
पहाड़ों से बहकर आए पानी और मलबे के सैलाब ने हंसते-खेलते गांवों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है. सैकड़ों लोग इस त्रासदी में अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. हजारों की आबादी बेघर होकर अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर है. राहत और बचाव कार्य के लिए 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा गया है और लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन तक की मदद ली जा रही है.
आपदा पर आपदा: बाढ़ के बीच भूकंप का खौफ
Nepal Earthquakeनेपाल में स्थिति इसलिए भी बेहद नाजुक हो गई है क्योंकि जल प्रलय से पहले ही राहत कार्य चलाना बेहद मुश्किल हो रहा था. उफनती नदियां, जगह-जगह टूटते पहाड़ और बहती सड़कें बचाव कार्य में बड़ी रुकावट बनी हुई थीं. ऐसे में अचानक आए भूकंप के झटकों ने बचाव कर्मियों और शरण शिविरों में रह रहे पीड़ित लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए.
















