कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है, जिसे 118 सांसदों का समर्थन मिला है। इस कदम के बाद संसद के भीतर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्ष की बातों को ठीक से रखने का मौका नहीं दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि स्पीकर पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। उनका कहना है कि स्पीकर पर दबाव बनाया गया है, इसी वजह से उन्हें खुद बयान देना पड़ा, जो सही नहीं है।
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री पर किसी तरह के हमले की बात ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव के चलते ही स्पीकर को सफाई देनी पड़ रही है। उनका यह भी कहना था कि जिस दिन यह मुद्दा उठा, उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद नहीं थे, इसलिए स्पीकर की ओर से बयान देना गलत परंपरा है।
कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या लोकसभा में यह प्रस्ताव पारित हो पाएगा। साथ ही लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के क्या नियम हैं और भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक कितनी बार स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है
लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
- लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के कार्यप्रणाली नियमों के अनुच्छेद 200 के तहत संचालित होती है।
- कोई भी सदस्य जो स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाना चाहता है, उसे लोकसभा महासचिव को लिखित रूप में प्रस्ताव का पूरा पाठ सौंपना पड़ता है।
- इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे आरोपों को स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखा जाना, जिसमें कोई तर्क, अनुमान, व्यंग्य, आरोप या अपमानजनक बातें शामिल न हों।
- नोटिस मिलने के बाद, प्रस्ताव पेश करने की अनुमति के लिए संबंधित सदस्य के नाम पर कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
- प्रस्ताव की चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तिथि से कम से कम 14 दिन बाद होती है।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए, अन्यथा यह गिर जाता है।
- आमतौर पर, प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर बहस और मतदान होता है। जब प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर या उप-स्पीकर अध्यक्षता नहीं कर सकते।
- अंत में, प्रस्ताव को सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित होना जरूरी है।
इतिहास में स्पीकर के खिलाफ कितने अविश्वास प्रस्ताव?
लोकसभा के इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अब तक तीन प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाए।
- पहला मामला 18 दिसंबर 1954 का है, जब तत्कालीन स्पीकर जी।वी। मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव आया, लेकिन बहस के बाद सदन ने इसे खारिज कर दिया।
- दूसरा 24 नवंबर 1966 में हुकम सिंह के खिलाफ लाया गया, जो 50 सदस्यों के समर्थन की कमी के कारण गिर गया।
- तीसरा 15 अप्रैल 1987 में बलराम जाखड़ के विरुद्ध था, जिसे बहस के बाद अस्वीकार कर दिया गया।
इसके अलावा, 1967 में डॉ। नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में जी।एम।सी। बालयोगी, 2011 में मीरा कुमार और 2020 में ओम बिरला के खिलाफ नोटिस की चर्चाएं जोरों पर रहीं, लेकिन ये कभी अमल में नहीं आए।
क्यों लाया जा रहा अविश्वास प्रास्ताव?
संसद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी को भाषण पूरा करने नहीं दिया गया। लोकसभा में वोइपक्ष के नेता नरवने की किताब पर बोलना चाहते थे। जिसके बाद हंगामे की वजह से कांग्रेस के 7 सांसद समेत 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
















