स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे चरण में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। SIR शुरू होने से पहले इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या 50.90 करोड़ थी, जो अब घटकर 44.40 करोड़ रह गई है।
चुनाव आयोग के मुताबिक यह कदम मतदाता सूची को अधिक साफ, सटीक और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा, ताकि किसी भी तरह की गलती को ठीक किया जा सके।
वोटर लिस्ट से क्यों हटाए गए इतने नाम?
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, उन्हें ASD श्रेणी में रखा गया है। ASD का मतलब है — अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट मतदाता।
आयोग के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे नाम पाए गए जो लंबे समय से मतदान नहीं कर रहे थे या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि SIR अभियान के दौरान शहरी इलाकों में फॉर्म जमा करने की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कम रही, जिस वजह से शहरों में नाम कटने की संख्या अधिक रही। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
SIR प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची मंगलवार को जारी की गई, जिसमें 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हटाए गए नाम कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत हैं। इनमें 46.23 लाख नाम मृत मतदाताओं के, 2.17 करोड़ नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के और 25.46 लाख नाम डुप्लिकेट पंजीकरण के पाए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है।
12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेज हुई SIR प्रक्रिया
SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू किया गया था। असम में यह प्रक्रिया अलग से चल रही है।
चुनाव आयोग ने बताया कि अंतिम SIR मतदाता सूची को कट-ऑफ तिथि के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जैसा पहले बिहार में किया गया था। अधिकतर राज्यों में पिछला गहन संशोधन 2002 से 2004 के बीच हुआ था। आयोग के अनुसार SIR का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच के जरिए अवैध विदेशी प्रवासियों को मतदाता सूची से बाहर करना है। इसे देश की चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
















