ब्रेंट क्रूड की कीमतें कम होने के साथ ही, अब भारत में ईंधन की कीमतों में संभावित कटौती पर ध्यान केंद्रित हो रहा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि कीमतों में बदलाव इंटरनेशनल मार्केट के रुझानों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की वित्तीय सेहत पर निर्भर करता है।
ब्रेंट क्रूड 70-72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
: इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है। इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि फिलहाल तत्काल राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें अगले 2-3 महीने तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती पर विचार किया जा सकता है।
पेट्रोल-डीजल सस्ता होने पर क्या बोले मंत्री?
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के दौरान ऊंचे दाम, अधिक बीमा लागत और ज्यादा फ्रेट चार्ज पर खरीदा गया था। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हालिया गिरावट का फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच सकता।
क्यों नहीं घटे अभी तक ईंधन के दाम?
मंत्री के अनुसार तेल विपणन कंपनियां (OMCs) आमतौर पर दो महीने पहले कच्चा तेल खरीदती हैं। इसका मतलब है कि वर्तमान में बिक रहा पेट्रोल और डीजल उस तेल से तैयार हुआ है जो अप्रैल और मई में ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। इसी वजह से कीमतों में तत्काल कटौती मुश्किल है
तेल कंपनियों को हुआ भारी नुकसान
सरकार के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर करीब ₹74,781 करोड़ का नुकसान हुआ। कंपनियों ने ग्लोबल कीमतों में उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाला, जिससे उनके वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव पड़ा।
ब्रेंट क्रूड में आई है नरमी
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने और वैश्विक सप्लाई में सुधार के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के उच्च स्तर से नीचे आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेंट क्रूड हाल में करीब 70-72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे बाजार में ईंधन कीमतों में राहत की उम्मीद बढ़ी है।
क्या अगले कुछ महीनों में मिल सकती है राहत?
हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह या महीनों तक स्थिर और निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि भविष्य की कीमतों पर अभी कोई निश्चित अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता रहता है तो आने वाले महीनों में भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर राहत मिल सकती है। फिलहाल तेल कंपनियों के पुराने महंगे स्टॉक और हालिया नुकसान कीमतों में कटौती के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
















