छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा में बदलाव कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर घटना के दौरान पेनिट्रेशन साबित नहीं होता है, तो उसे दुष्कर्म नहीं बल्कि दुष्कर्म की कोशिश माना जाएगा।
यह फैसला सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने पाया कि मेडिकल सबूतों में पेनिट्रेशन की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए आरोपी की सजा सात साल से घटाकर साढ़े तीन साल कर दी गई।
कोर्ट ने क्यों बदली सजा ?
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि आरोपी का इरादा अपराध करने का था, लेकिन अभियोजन पक्ष पेनिट्रेशन को साबित करने में सफल नहीं रहा। 2004 में लागू IPC की धारा 375 के तहत रेप साबित करने के लिए पेनिट्रेशन जरूरी माना जाता था।
इसी आधार पर कोर्ट ने IPC की धारा 376(1) के तहत दी गई सजा को बदलकर धारा 376/511 (दुष्कर्म की कोशिश) में बदल दिया। मामला 21 मई 2004 का धमतरी जिले का है।
क्या था पूरा मामला ?
अभियोजन के अनुसार आरोपी ने पीड़िता को जबरदस्ती उसके घर से उठाकर अपने घर ले गया, उसके कपड़े उतारे और उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की।
पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया गया, उसके हाथ-पैर बांध दिए गए और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया। कुछ घंटों बाद उसकी मां ने उसे छुड़ाया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला
साल 2005 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376(1) और 342 के तहत दोषी ठहराते हुए रेप के लिए सात साल की सजा और अवैध तरीके से बंधक बनाने के लिए छह महीने की सजा सुनाई थी।
कहां अटका मामला
हाईकोर्ट में अपील का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या पेनिट्रेशन हुआ था या नहीं। पीड़िता ने शुरुआती बयान में पेनिट्रेशन का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में कहा कि आरोपी ने केवल प्राइवेट पार्ट्स का संपर्क किया था, पेनिट्रेशन नहीं हुआ।
मेडिकल रिपोर्ट में भी हाइमन सुरक्षित पाई गई, हालांकि शरीर पर लाल निशान और कपड़ों पर स्पर्म के सबूत मिले।
कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी ने यौन उत्पीड़न किया और उसका इरादा भी स्पष्ट था, लेकिन पेनिट्रेशन के पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसलिए इसे रेप नहीं बल्कि रेप की कोशिश माना गया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में तैयारी और कोशिश के बीच अंतर समझना जरूरी है। पीड़िता को जबरदस्ती ले जाना, कपड़े उतारना और बंधक बनाना ये सब रेप की कोशिश को दर्शाते हैं, लेकिन पेनिट्रेशन के बिना इसे रेप नहीं माना जा सकता।इसी आधार पर अदालत ने सजा में बदलाव करते हुए आरोपी को कम सजा सुनाई।















