अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान कथित तौर पर हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को ऑपरेशन के लिए जगह उपलब्ध करा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे स्थानीय संगठनों को भी समर्थन मिल रहा है। इन संगठनों की गतिविधियों को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा, पाकिस्तान गाजा और कश्मीर के मुद्दे पर इस्लामी देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत, पश्चिमी देशों और इजरायल के खिलाफ स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठनों को एकजुट करने के लिए पाकिस्तान हमास को शरण दे रहा है।हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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पाकिस्तान का समर्थन
रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में परोक्ष संघर्षों और सशस्त्र टकरावों की नई लहर को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के पश्चिम एशिया की ओर झुकाव को तत्काल चुनौती के रूप में लेना चाहिए। यह इसलिए मायने रखता है, क्योंकि जब पाकिस्तान पश्चिम एशिया में उपस्थिति बढ़ाएगा, तो आतंकवादी संगठनों के लिए उसका खुला समर्थन एक क्षेत्रीय समस्या बन जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को भारत विरोधी गतिविधियों में समर्थन दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद इन पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद ये अपने सहयोगी संगठनों के माध्यम से सक्रिय हैं। राजनीतिक और धार्मिक मंचों ने भी हमास प्रतिनिधियों को लगातार समर्थन दिया है।
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हमास प्रतिनिधि की आतंकियों से मुलाकात
जनवरी 2024 में पाकिस्तान की सीनेट ने हमास प्रतिनिधि खालिद कद्दौमी की मेजबानी की और सीनेटरों ने सार्वजनिक रूप से स्वागत किया। फरवरी 2025 में कद्दौमी ने गुलाम जम्मू और कश्मीर में एक कार्यक्रम में भाग लिया और आतंकवादियों से मुलाकात की।
















