अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ा तनाव हर दिन और खतरनाक होता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि यह हमला अमेरिका और Israel की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुआ। इसके बाद से इजरायल और अमेरिका लगातार Iran के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, जबकि ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है। इसी बीच यह जानकारी सामने आई है कि खामेनेई पर हमले के लिए इजरायल ने किस मिसाइल का इस्तेमाल किया था।
किस मिसाइल का इस्तेमाल हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खामेनेई को निशाना बनाने के लिए Blue Sparrow missile का इस्तेमाल किया गया था। ब्लू स्पैरो को दुनिया की खतरनाक मिसाइलों में गिना जाता है। यह लंबी दूरी से दागी जाने के बाद भी अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला करने में सक्षम है।
कैसे किया गया हमला?
बताया जा रहा है कि इस हमले की योजना काफी समय से तैयार की जा रही थी। तेहरान में खामेनेई की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। 28 फरवरी को जब खामेनेई तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट स्थित एक नेतृत्व परिसर में उच्च स्तरीय बैठक के लिए पहुंचे, उसी दौरान परिसर पर मिसाइल हमला किया गया। इस हमले में खामेनेई समेत ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई।
ब्लू स्पैरो मिसाइल की खासियत
ब्लू स्पैरो मिसाइल को इजरायल की रक्षा कंपनी Rafael Advanced Defense Systems ने विकसित किया है। यह इजरायल की उन्नत एयर लॉन्च मिसाइलों के परिवार का हिस्सा है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल मिसाइल डिफेंस सिस्टम के परीक्षण और बैलिस्टिक मिसाइल खतरों के सिमुलेशन के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिसाइल को F-15 Eagle लड़ाकू विमान से लॉन्च किया गया था। लॉन्च होने के बाद मिसाइल तेजी से ऊपरी वायुमंडल की ओर बढ़ती है और फिर तेज गति से नीचे आकर अपने लक्ष्य को निशाना बनाती है।
कितनी है इसकी रेंज?
ब्लू स्पैरो एक बड़े मिसाइल परिवार का हिस्सा है, जिसमें ब्लैक स्पैरो, ब्लू स्पैरो और सिल्वर स्पैरो जैसी मिसाइलें शामिल हैं। यह मिसाइल करीब 6.5 मीटर लंबी और लगभग 1900 किलोग्राम वजन की होती है। इसकी मारक क्षमता करीब 2000 किलोमीटर तक बताई जाती है। यही वजह है कि इसे दुश्मन के इलाके से काफी दूर रहकर भी दागा जा सकता है।
कैसे काम करती है यह मिसाइल?
ब्लू स्पैरो मिसाइल हाई बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी का इस्तेमाल करती है, जिससे इसे रोकना काफी मुश्किल हो जाता है। लड़ाकू विमान से लॉन्च होने के बाद इसकी रॉकेट मोटर इसे ऊंचाई तक ले जाती है। इसके बाद यह तेज गति से दोबारा वायुमंडल में प्रवेश कर लक्ष्य की ओर बढ़ती है।
मिसाइल में लगा गाइडेंस सिस्टम लक्ष्य को बेहद सटीक तरीके से हिट करने में मदद करता है। इसकी तेज गति, ऊंचाई और दिशा बदलने की क्षमता के कारण दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है।















